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Zehar - A Bad Story of Successful Farmers
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This story is about the successful and poor farmer of the village. Who wants to succeed with their hard work. Hence husband and wife work hard day and night together. After that the farmer has everything that a good farmer has. Meanwhile, an incident happens that causes the whole family to fray and all the dreams of that farmer are shattered. The whole family starts craving one roti.

एक गांव था जिसका नाम अर्जुनपुर था। अर्जुनपुर में काफी अमीर और गरीब दोनों प्रकार के लोग रहते थे। गांव में अक्सर बुराइयां चलती ही रहती हैं किंतु कभी-कभी लोग आपस में कुछ ऐसा कदम उठा देते हैं जिससे एक को नहीं बल्कि पूरे गांव को दुख होता है। आज मैं एक ऐसे ही कहानी के बारे में बताने जा रहा हूं।

अर्जुनपुर में घुरई नाम का एक किसान रहता था। घुरई अपने काम मैं व्यस्त रहता था। और जब उसे समय मिलता तब वह अपने जानवरों को चारा घास करता था। इसी तरह घुरई और उसकी पत्नी पार्वती की जिंदगी कट रही थी। घुरई के पास एक शानदार बैलों की जोड़ी थी। वह अपने बैलों पर जान छिड़कता था। गांव में ऐसी बैलों की जोड़ी किसी के पास नहीं थी। अगर देखा जाए तो आसपास के गांवों में भी बैलों की ऐसी जोड़ी किसी ने नहीं देखी थी।

बैल एकदम सीधे और सरल स्वभाव के थे। घुरई जब भी खेतों में जुताई करता बैल अपने आप हल को आराम से खींचते रहते। बैलगाड़ी में भी इस तरह की चाल चलते थे। गांव वालों को देखकर जलन सी होती थी। घुरई किसी की परवाह नहीं करता। वह अपनी खेती किसानी और बैलों में व्यस्त रहता। उसकी पत्नी भी खेतों पर उसके साथ ही काम करती थी।

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घुराई के पास दो बैलों के अलावा एक भैंस भी थी। भैंस इतनी सुंदर थी कि जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते थे। एकदम काली चमड़ी बिल्कुल चिकनी जिस पर घुरई कभी मक्खी तक नहीं बैठने देता। दूध देने में चार भैंसों के बराबर थी। लोग घुरई की भैंस की चाल देखते तो उन्हें अंदर ही अंदर जलन जैसी होने लगती थी। घुरई की भैंस के पेट में बच्चा था जो अगले महीने ही ब्याने वाली थी। घुरई के पास उसकी भैंस के लिए दूर-दूर से ग्राहक आयें और मनमानी कीमत भी देने को तैयार हुए। लेकिन घुरई ने अपनी भैंस को बेचना उचित नहीं समझा।

वह अपने भैंस को बच्चों की तरह पाल रहा था। उसकी पत्नी भी उस भैंस को बहुत ही ज्यादा प्यार करती थी। पति पत्नी के अलावा घुरई के दो बच्चे भी थे। बड़ा बच्चा लड़का था जिसकी उम्र लगभग 10 साल थी और छोटा बच्चा लड़की थी जिसकी उम्र 5 साल थी। घुरई की बहुत ही खुशहाल जिंदगी कट रही थी। उसका बेटा भी पढ़ने में बहुत ही होशियार था जिसकी गांव में लोग काफी तारीफ करते थे।

एक लड़का और एक लड़की होने से घुरई बहुत ही खुश था वह अपनी खेती किसानी करता और जो कमाता उससे उसकी जिंदगी आराम से कट रही थी। एक दिन घुरई खेतों पर काम करने गया था। उसकी पत्नी भी खाना लेकर खेत पर ही गई थी। बच्चे बाहर खेल रहे थे। घुरई दोपहर भर काम करता रहा। उसकी पत्नी भी उसके साथ में ही उसका हाथ बंटाती रही चिलचिलाती दोपहर में दोनों काम में व्यस्त थे।

थोड़ी देर बाद घुरई ने उठ कर देखो चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था। उसे एहसास हुआ कि अब खेतों में कोई भी आदमी नहीं है। इसलिए वह भी आराम करने के लिए घर के निकल पड़ा। घुरई का एक छोटा सा बाग था। जिसमें 5 पेड़ खड़े थे। जिसमें दो आम के और तीन शीशम के पेड़ थे। घुराई की पत्नी जब खेतों पर जाती तो अपने जानवरों को बाग में पेड़ों की छाया में बांध देती थी। यह उसका रोज का नियम था। आज भी जब घुरई की पत्नी खेतों पर गई तो उसने अपने बैलों और भैंस को बाग में पेड़ों की छाया में बांध दिया उन्हें पानी पिलाया और खेतों पर चली गई।

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घुरई और उसकी पत्नी जब दोपहर में खेतों से लौट कर आए तो देखा उनके तीनो जानवर बाग में बेचित से लेटे हुए थे। घुराई को कुछ शक सा हुआ। इसलिए वह सीधा अपने जानवरों के पास पहुंचा। उसके दोनों बैल और भैंस ऊपर को मुंह किए हुए लेटे हुए थे। जिनके मुंह से हल्का हल्का सा झाग निकल रहा था। घुरई यह देखकर घबरा गया। वह समझ चुका था कि मेरे जानवरों के साथ किसी ने कुछ तो गलत किया है। इसलिए उसने समय नहीं गंवाया और वह सीधा हकीम जी के पास गया।

हकीम जी को जैसे ही घुरई ने सारी बात बताई तो हकीम जी भी दौड़े दौड़े आए। हकीम जी ने जानवरों की हालत देखी। तो उनकी आंखों से भी रुआसी निकल पड़ी। तीनो जानवर हल्की हल्की सी सांस ले रहे थे। हकीम जी ने जल्दी से दवा बनाई और तीनों जानवरों को पिलाई लेकिन वह जानवर उस दवाई को पी नहीं सके तीनों जानवरों की आंखें फट चुकी थी। घुरई और उसकी पत्नी खड़े से जमीन पर ही गिर पड़े।

लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गयी थी। हकीम जी भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे। हकीम जी ने बताया कि जानवरों को जहर दिया गया है। जब इस बात का पता घुरई को लगा तो वह और भी विचलित हो गया। वह सोचने लगा कि मैंने कभी भी किसी का बुरा किया ही नहीं फिर मेरे साथ यह सब किसने किया है। यह सोचने के बाद उसने हकीम जी के ओर हाथ जोड़ते हुए कहा- हकीम जी क्या हमारे जानवरों में अभी सांस बाकी है। लेकिन हकीम जी के मुंह से आवाज नहीं निकल सकी। इसलिए उन्होंने गर्दन हिलाकर ही ना का इशारा कर दिया। इतना सुनते ही घुरई और उसकी पत्नी चीख चीख कर रोने लगे।

पूरा गांव इकट्ठा हो गया था। सभी लोग उस आदमी को बद्दुआ दे रहे थे। जिसने इंसान होकर जानवरों के साथ ऐसा व्यवहार किया था। उस दिन के बाद घुरई ने गांव ही छोड़ दिया और वह कहां चला गया इसका आज तक किसी को पता नहीं चला। आज भी लोग जब बैलों और भैंसों की बात करते है तो लोग सीना तान कर घुरई के जानवरों का उदाहरण देते हैं।

आज घुराई भी नहीं है उसके जानवर भी नहीं है सिर्फ एक टूटी झोपड़ी में उसकी पत्नी और उसके दो बच्चे रहते हैं। जो एक एक रोटी को तरसते हैं। घुराई के जानवरों को किसने जहर दिया इसका आज तक पता नहीं चल पाया। लेकिन गांव के लोग आज भी यह जरूर कहते हैं की घुरई के जानवरों को जहर देने वाले का सत्यानाश हो जाएगा।

वी.के. सिंह, राजकोट, गुजरात  

स्वतन्त्र लेखक एवं पत्रकार 


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