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भारत की आजादी के 73 साल बाद भी अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछडा वर्ग के लोग अपने अधिकारों से बंचित क्यों ?
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हमारे देश को आजाद हुए 73 साल हो गए हैं। 1950 में हमारा भारत देश पूरी तरह से आजाद हो गया था किन्तु आज भी संविधान में दिए गए अधिकारों का अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछडा वर्ग के लोग उपयोग नहीं कर पाते हैं। आखिर पढ़े लिखे होने के बाद भी अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछडा वर्ग के लोग अपने अधिकारों को नहीं जानते डॉ. भीम राव अम्बेडकर द्वारा संविधान में दिए गए अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछडा वर्ग के अधिकारों का हनन हो रहा है। अब अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछडा वर्ग के लोगों को खुद आगे आकर अपने अधिकारों को जानना होगा और खुद के अधिकारों के लिए लड़ना होगा। मैं सभी अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछडा वर्ग के लोगों से निवेदन करता हूँ कि सामने आयें और अपने बंचित अधिकारों को मांगे नहीं लड़ें।

सेवा में,
अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछडा वर्ग।
विषय– बाबा साहब द्वारा रचित संविधान के तहत संवैधानिक अधिकारों को जानने व जागरूक होने के संबंध में।
महोदय,
निवेदन यह कि हम सभी अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के सभी लोग, जैसा कि हमें ज्ञात है हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद तो जरूर हो गया परंतु हमारे देश में नियम व कानून अंग्रेंजो के ही थे। साथियों हमारे देश में संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 ई० को डॉ० सच्चिदानंद सिन्हा के अस्थायी सभा पतित्व में हुई। 11 दिसम्बर 1946 ई० को डॉ० राजेन्द्र प्रसाद को सभा का स्थायी अध्य्क्ष चुना गया जो अंत तक रहे। इसी सभा ने एक प्रारूप समिति का गठन किया जिसके अध्य्क्ष परम पूज्य भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉ० भीमराव अम्बेडकर को चुना गया। और बाबा साहब ने पूरी जिम्मेदारी के साथ उन दलितों को ध्यान मे रखते हुए जिनको उन तालाबों, पोखरों झीलों का पानी भी पीना मना था जिनका पानी मनुवादियों के शेर हाथी कुत्ता और बिल्ली पिया करते थे को अपने जीवन की एक एक रक्त की बूंद को कलम में फूंक फूंक कर दो वर्ष ग्यारह माह अट्ठारह दिन में भारत के राजतंत्र को समाप्त कर प्रजातंत्र की स्थापना की।
दोस्तों आज यदि हमें कोट टाई चश्मा व जेब मे कलम रखने का अधिकार है तो सिर्फ बाबा जी की बदौलत। और इस प्रकार हमारा संविधान 26 जनवरी 1949 को बनकर तैयार हो गया। और इसे लागू करने के लिए एक वर्ष का इंतजार करना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेसियों ने सर्वप्रथम 26 जनवरी को ही प्रतिज्ञा की थी कि हम अपना संविधान लेकर रहेंगे। इस प्रकार हमारे देश का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया तथा संविधान सभा के सभी सदस्य इसकी प्रस्तावना में सम्मिलित होकर यह कहा—
हम भारत के लोग सम्पूर्ण भारत को प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक राजनैतिक न्याय विचार की अभिव्यक्ति विश्वास और धर्म प्रतिष्ठा व अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए उन सबमें ब्यक्ति की गरिमा व राष्ट्र की एकता तथा अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता को बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई० मिति मार्गशीर्ष सप्तमी संवत 2006 विक्रमी को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित व आत्मार्पित करते हैं।

लेखक – आचार्य राजकिशोर भारती एम० ए० बी० एड० ए० डी० सी० एस० ई०,  उत्तर प्रदेश 


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