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हम आज भी नहीं भूल पाए भाग-1
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सन 2006 में मेरे स्नातक का अंतिम वर्ष था . पढ़ने के बाद कभी थका सा महसूस कर रहा था और कहीं घूमने का बहुत मन कर रहा था . हास्टल में रहकर पढ़ाई करना काफी कठिन होता है किन्तु अगर नियमों को ध्यान में रखा जाय तो सफलता भी बहुत जल्दी मिलती है .


स्नातक के अंतिम वर्ष में एक टूर जाता है और सभी विद्यार्थियों को किसी गाँव में 6 महीने तक रखा जाता है ताकि विद्यार्थी में गाँव के कल्चर का भी ज्ञान हो जाए .ऐसे में जब भी नौकरी लगती है तो क्षेत्र गाँव का मिला या शहर का सभी में विद्यार्थी सरवाइव कर सकता है . हमारा भी टूर जाना था .अन्दर ही अन्दर बहुत खुशी थी कि गाँव में 6 महीने रहने को मिलेगा और खूब सारी मस्ती करने को मिलेगी .


आपको बता दें कि गाँव में 6 महीने रहने का सिलेबस है किन्तु यूनिवर्सिटी द्वारा सिर्फ 3 महीने के लिए भेजा जाता है .तीन महीने का खर्चा भी University द्वारा ही दिया जाता है . जनवरी माह में हमारा टूर भेजा गया .मुझे मेरे चार साथियों के साथ उत्तर प्रदेश, कानपुर के नजदीक एक गाँव में भेजा गया . University की बस गई और गाँव में ही स्थिति पंचायत घर में छोड़ दिया गया . दो-तीन दिन तक तो हम लोगों को बहुत बुरा लगा . हम लोगों से कोई बोलने वाला नहीं था .हम लोग एक दम अजनवी थे . इसलिए बहुत ही अजीब सा लग रहा था .


चौथे दिन एक 50 साल की माता जी आयीं उनके हाथ में लाई और दालमोठ था . उन्होंने वह लाई और दालमोठ हम लोगों को दे दी . उन्होंने मुझसे कहा ये सामने ही मेरी दूकान है . जो भी जरूरत हो ले लेना .इस लाई और दालमूठ को मिला लेना जिससे आप लोगों का नाश्ता हो जाया करेगा .


उस दिन उन माता जी के आने से पंचायत घर में रौनक सी आ गई थी . अब अक्सर वह माता जी आतीं और हम लोगों का हाल चाल पूछती रहतीं थी . हम लोगों के पास कोई ख़ास काम तो था नहीं . इसलिए खाली समय में बोरियत बहुत होती थी . एक दिन मैं बाहर बैठा था और अचानक मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों न छोटे-छोटे बच्चों को फ्री में पढ़ाया जाय . मैंने अपने अन्य दोस्तों से राय ली तो वह भी सहमत हो गए .


अगले ही दिन से मैंने पास पडौस के रहने वाले सभी बच्चों को फ्री पढ़ने के लिए आमंत्रित किया लेकिन उस दिन सिर्फ चार बच्चे ही आये थे . हम सभी लोगों ने अच्छे से उन्हें पढ़ाया और साथ में अन्य बच्चों को भी लाने को कहा . पांच दिन के अन्दर लगभग 60 बच्चे पढ़ने आने लगे . हम लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था . अब हम लोगों का दिन ऐसे कट जाता पता ही नहीं चलता था .

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इसके बाद हम लोगों ने बच्चों को अंग्रेजी और अच्छी आदतों में इतना निपुड कर दिया कि बच्चे सुबह उठते ही अपने माँ और पिता के पैर छूते साथ में अंग्रेजी में बहुत ही ज्यादा निपुड हो गए थे . इसके बाद बच्चों के माता पिता आते और बहुत ही हम लोगों की तारीफ करते . बच्चों के अन्दर आये बदलाव ने न सिर्फ परिवार वालों बल्कि गाँव वालों को भी बहुत प्रभावित किया था . अब हम लोगों की तो निकल पड़ी थी .गाँव वाले हम लोगों को बहुत प्यार करने लगे थे . सुबह होते ही कोई खेतों से ताजी सब्जी दे जाता तो कोई दूध . हम लोगों ने अब और भी बच्चों पर मेहनत करनी शुरू कर दी थी .बच्चों और हम लोगों में इतना ज्यादा प्रेम हो गया था कि वो सभी स्कूल से आते ही सीधे हम लोगों के पास आते थे .


इसी बीच एक घटना घटित हो गई . एक दिन मैं गाँव के ही प्राथमिक और जूनियर स्कूल में अपने दोस्त संतोष के साथ गया था किन्तु उस दिन स्कूल बंद था . इसलिए हम दोनों लोग स्कूल के इधर उधर घूमने लगे . तभी पास में ही रखे ट्रांसफार्मर से बहुत जोर से आवाज आयी . हम दोनों लोग उसी तरफ भागे जिस तरफ से आवाज आयी थी . पास जाकर देखा तो एक आदमी नीचे पड़ा तड़प रहा था और उसके पास ही खड़ा उसका बेटा जोर-जोर से चिल्ला रहा था किन्तु वहां से गाँव की दूरी लगभग एक किलोमीटर थी .

इसलिए वहां कोई बचाने वाला नहीं था . इसलिए मैं उसे बचाने पहुंचा किन्तु उसकी हालत बहुत ख़राब थी उसको बिजली का करंट लगा था .इस लिए मेरे दोस्त संतोष ने उसे छूने से भी मना कर दिया .लेकिन मेरा मन नहीं माना और मैंने उस कमजोर से आदमी को अपने दोनों हाथों पर उठाया एवं उसके बेटे से घर से लोगों को बुला लाने को कहा .

खेतों में मैं लगभग 700 मीटर तक उसे लेकर गया तबतक उसके परिवार के लोग चारपाई लेकर आ गए .उस जख्मी व्यक्ति की बेटी बहुत ज्यादा रो रही थी .मैंने उसे धीरज बंधाया और उसके पिता को अस्पताल भेज दिया गया . एक हफ्ते के उपचार के बाद वह व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो गया .एक दिन उन लोगों ने मुझे घर पर बुलाया और कहने लगे, बेटे तुम न होते तो शायद मैं आज जिन्दा न होता, मैंने कहा ऐसा कुछ नहीं ये सब भगवान की मर्जी से होता है . भगवान ने मुझे आपकी मदद के लिए भेजा था इसलिए मैं आपकी मदद कर सका . उसके बाद हम लोग गाँव में और भी चर्चित हो गए थे .गाँव का हर आदमी हम लोगों को सम्मान देता था और हम लोगों की एवं लोग हमारी मदद करते थे .


एक महीना हम लोगों का बीत गया था अभी बहुत कुछ हम लोगों के साथ होने वाला था .उसका वर्णन हम इस कहानी के दूसरे भाग में करेंगे .दूसरा भाग बहुत ही ज्यादा इमोशनल है इसलिए उसे पढ़ना बिल्कुल भी न भूलें .

– राम कुमार (वर्तमान में अध्यापक ) कन्नौज, उत्तर प्रदेश


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