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Unwavering : A story of a girl's unswerving hauls that success will kiss every person's steps after reading
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अंजली अपने माता पिता की इकलौती संतान थी। उसके माता-पिता बहुत ही गरीब थे। इतने ज्यादा गरीब थे कि दो वक्त का खाना भी जुटा पाना उनके लिए बहुत ही मुश्किल था। अंजलि जब छोटी थी तब उसे इस बात का अंदाजा नहीं था लेकिन जब बड़ी हुई तब उसे पता चला कि गरीबी क्या चीज होती है। अंजलि के माता पिता दोनों मिलकर रात दिन मेहनत करते लेकिन इसके बावजूद भी उनकी हालत बहुत ही खराब थी। इसका मुख्य कारण था कि उनको मजदूरी बहुत कम मिलती थी और जो मजदूरी उन दोनों लोगों को मिलती थी। उससे किसी तरफ पेट ही पाला जा सकता था।

अन्य कोई सामान खरीदना उनके लिए असंभव सी बात थी। अंजली ने किसी तरह बारहवीं तक पढ़ाई की इसके बाद उसके माता-पिता ने उसे घर में बिठा दिया क्योंकि उनके पास अब उसे आगे बढ़ाने के लिए पैसा नहीं था। लेकिन अब अंजली के इरादे बहुत ही बदल चुके थे। वह अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहती थी। अपने माता पिता को इस गरीबी रूपी दलदल से बाहर निकालना चाहती थी किंतु आज की दुनिया में बिना पैसे के कुछ भी नहीं होता। इसलिए अंजलि ने घर-घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया।

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जब उसने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया तो उसे काफी मुसीबतों का सामना भी करना पड़ा लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। क्योंकि उसने ठान लिया था कि हमें इन सभी मुसीबतों को दरकिनार करते हुए जिंदगी में कुछ ऐसा करना है जो यादगार हो और हमारे परिवार का उद्धार भी कर सके। इसलिए अंजलि सुबह और शाम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती। ट्यूशन से जो भी पैसा एकत्र होता उससे वह खुद अपनी पढ़ाई करती थी। किसी तरह उसने उन मुसीबतों को रास्ता दिखा कर स्नातक की परीक्षा बहुत ही अच्छे अंको से पास की।

अब उसे कुछ करने का समय था। इसलिए उसने आईएस की तैयारी करनी शुरू कर दी। उसने इस तरह का लक्ष्य बना रखा था कि मुझे किसी भी हालत में आईएएस बनना है और उसके पास ज्यादा समय भी नहीं था क्योंकि अधिक समय का मतलब अधिक पैसे का खर्च होना। इसी बीच एक दुर्घटना में उसके पिता की मृत्यु हो गई। उसको बहुत बड़ा धक्का लगा। अब उसका परिवार और भी भुखमरी की कगार पर आ गया था लेकिन इसके बावजूद भी अंजलि ने हिम्मत नहीं हारी। उसने जो इरादा बनाया था जो मन में ठान रखा था। उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया।

वह दिन रात मेहनत करती। उसके पास ज्यादा किताबें नहीं थी। इसलिए वह अपने कुछ मित्रों से किताबें मांग लेती और उन्हें रात में पढ़कर काम चलाती थी। उसके परिवार की हालत और भी बद से बदतर हो गई थी लेकिन अंजलि को रोकने वाला दुनिया में कोई पैदा नहीं हुआ था। उसके पास पढ़ने के लिए रोशनी की व्यवस्था नहीं थी लेकिन उसे इस बात का डर नहीं था और वह अपनी मां से भी इस बात का जिक्र नहीं कर सकती थी। क्योंकि वह जानती थी की मां के पास भी इतना पैसा नहीं है।

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इसलिए रात में जब सब लोग सो जाते हैं। तब अंजली पास में ही खंबे में लगे बल्ब के नीचे जाकर पढ़ाई करती। आसपास के लोगों ने अंजली की मां को बहुत समझाया कि आपकी बेटी रात में सड़क पर बैठकर पढ़ाई करती है। अगर उसके साथ कुछ अनहोनी हो गई तो क्या होगा। लेकिन अंजलि की मां भी जानती थी कि अंजलि को रोकना मेरे क्या दुनिया में किसी के बस की बात नहीं है। वह हर समय किताबों में ही डूबी रहती थी। कभी-कभी वह सुबह का खाना शाम को खाती थी क्योंकि उसको इस बात का पता ही नहीं चलता था कि सुबह से शाम कब हो गई।

दिन में ज्यादा से ज्यादा वह अपने समय का फायदा उठाती थी। इसके बावजूद भी रात में उसको नींद नहीं आती थी और वह सड़क पर जाकर पास में ही खड़े खंबे के नीचे बैठकर पढ़ाई करती थी। एक दिन कुछ शरारती लोगों ने अंजलि को छेड़ा भी किंतु उसने भी उन को करारा जवाब दिया। इससे उन लोगों के इरादे पस्त हो गए। जिससे अंजलि को अंदर ही अंदर और भी ताकत मिली। आईएस का उसने फॉर्म डाल दिया था। अगले महीने परीक्षा थी। उसे किसी भी समय चैन नहीं आ रहा था। उसकी नजर में सिर्फ एक ही लक्ष था आईएएस की परीक्षा पास करना। इसलिए वह दिन रात बहुत ही कठिन मेहनत करती थी। उसने अपना जो उद्देश्य बना रखा था वह उससे बिल्कुल भी हट नहीं रही थी।

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अंजली की मां ने कई बार समझाया कि बेटा खाना-पीना समय से ना खाने से तुम्हारा स्वास्थ्य खराब हो जाएगा किंतु इसके बावजूद भी अंजलि ने अपनी मां की बात पर भी ध्यान नहीं दिया। अपने लक्ष्य को ही निशाना बनाए रखा। आईएस की परीक्षा हो गई लोग अंजलि को देखकर मजाक उड़ा रहे थे। वह कह रहे थे यह लड़की आईएस बनेगी और ठहाका मार कर हंसते थे। किंतु अंजलि पर किसी की बात का असर नहीं पड़ रहा था। वह अपनी तैयारी में ही व्यस्त रहती थी। कुछ बातें मोहल्ले वालों की अंजली की मां को बुरी लगती थी लेकिन अंजलि अपनी मां को समझा देती थी।

आईएस का जब रिजल्ट आया तो अंजली का पूरे देश में पहला स्थान था। यह देख कर उसके मोहल्ले वालों की आंखें फटी की फटी रह गई। मेंस परीक्षा होनी बाकी थी। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता था कि अगर अंजलि प्रारंभिक परीक्षा मैं इतने अच्छे अंक ला सकती है तो मुख्य परीक्षा में उसे रोकना नामुमकिन सी बात है। यही हुआ भी मुख्य परीक्षा हुई और एक बार पुनः अंजलि ने प्रथम स्थान हासिल किया।

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इसके बाद इंटरव्यू हुआ। जिस में भी अंजलि को प्रथम स्थान हासिल हुआ। उसके इरादे इतने मजबूर थे कि उसके आसपास के लोगों ने उसे देख कर अपने बच्चों को अंजली की मिसाल देना शुरू कर दिया। वह दिन भी आया जब अंजली आईएएस अधिकारी बन गई। अब उसके परिवार की सारी समस्याएं खत्म हो चुकी थी। अंजलि ने मन में जो ठान रखा था। उसे कभी भी नहीं बदला। उसके इरादे बहुत ही मजबूत थे। उसे रास्तों में हजारों मुसीबतों का सामना पड़ा लेकिन उसने मुसीबतों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और वह करके दिखाया जो एक असंभव सा लग रहा था। आज अंजलि और उसकी मां बहुत ही खुश है।

जिन लोगों के इरादे मजबूत होते हैं और जो लोग सिर्फ अपने मन की सुनते हुए लगातार अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहते हैं। उन्हें दुनिया की कोई ताकत सफल होने में रुकावट नहीं पैदा कर सकती है। क्योंकि उन लोगों को पता होता है कि मुसीबतें सभी पर आतीं हैं चाहे वह गरीब हो या फिर अमीर। जो व्यक्ति उन मुसीबतों से डरे बिना आगे बढ़ता रहता है। किसी न किसी दिन उन्हें सफलता अवश्य मिलती है। इंसान की सबसे बड़ी समस्या इंसान खुद होता है। अगर खुद को इंसान अपने बस में कर लेता है तो वह, वह कर दिखाता है जो वह चाहता है। यही सफलता का सबसे बड़ा मूल मंत्र है।

Arjun Singh

Madhubani, Bihar

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