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छुआछूत- एक दर्दनाक प्रेम कथा ( Untouchability – A Painful Love Story )

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Untouchability is an epidemic that has destroyed millions of lives. Even today in the 21st century untouchability has not changed significantly. Untouchability has spread its footsteps even in the distant cities after the village. Millions of people have become homeless due to untouchability. The truth of untouchability is known only by those who pass through this scene. Untouchability is a type of poison that is spread in society. It is because of this that the situation in India today is like this. Today’s love story is based on untouchability, after reading, no one will be able to believe that even today such atrocities are perpetrated in the name of untouchability and caste.

ज्ञानपुर गांव में पंचायत लगी हुई थी। जिसमें कुछ लोग कुर्सियों पर बैठे थे और कुछ लोग जमीन पर बिछी हुई चादर पर बैठे हुए थे। वही एक बुजुर्ग भी बैठा था जिसकी उम्र लगभग 60 साल की थी। वह बुजुर्ग कुर्सियों पर बैठे लोगों के सामने हाथ जोड़कर माफी मांग रहा था लेकिन इसके बावजूद भी कुर्सियों पर बैठे लोग उस बुजुर्ग को बुरी तरह से डांट रहे थे। वह बुजुर्ग बार-बार हाथ जोड़कर माफी मांग रहा था लेकिन वहां किसी अन्दर उस बुजुर्ग के प्रति दया का भाव नहीं दिखाई दे रहा था। कुछ देर बाद यह आवाजें भी आने लगी कि इस बुड्ढे को मार दो। यह सभी आवाजें आते रहीं और वह बुजुर्ग आंसू बहाते हुए सभी से माफी मांगता रहा लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा और भरी पंचायत में लोगों ने उस बुजुर्ग आदमी को लात घूंसों से पीट पीट कर मार डाला।

इसके बाद पंचायत खत्म हो गई और वहां पर एक बुजुर्ग महिला आई। जो उस बूढ़े व्यक्ति से लिपट लिपट कर रोती रही। वह बार-बार किसी को बुरा भला बोल रहे थी। उसकी मदद करने वाला भी कोई नहीं था। इसलिए किसी तरह उसने उस बुजुर्ग व्यक्ति को अपने घर तक पहुंचाया और अकेले ही उसका अंतिम संस्कार किया। आखिर क्या हुआ था जो एक 60 साल के बुजुर्ग को लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला। आइए जानते हैं आखिर पूरी घटना क्या घटित हुई थी।

ज्ञानपुर के अवतार सिंह की बेटी शालनी सिंह बहुत ही खूबसूरत थी। उसकी उम्र 20 साल थी। शालिनी गांव से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कॉलेज से स्नातक कर रही थी। वह इतनी ज्यादा खूबसूरत थी कि कई लड़के उसके पीछे मंडराते रहते थे। लेकिन स्वभाव से बहुत ही सीधी थी। इसलिए वह किसी भी लड़के को भाव नहीं देती थी।

शालिनी के पिता गांव के जमींदार थे। इसलिए अगर वह किसी लड़के की शिकायत तक कर देती तो उसकी खैर नहीं थी। वह कभी भी किसी लड़के की शिकायत नहीं करती थी और स्कूल के लड़के भी उसके पिता को अच्छी तरह से जानते थे। इसलिए सिर्फ आसपास घूमते तो रहते मगर किसी की हिम्मत नहीं थी कि कोई उस पर बोल भी दे। शालिनी का क्षेत्र काफी पिछड़ा होने के कारण उसके पिताजी आज 21वीं सदी में भी लोगों से ऐसे काम कराते थे जैसे कोई किसान अपने खेत में किसी बैल से काम कराता है।

शालिनी के पास किसी चीज की कमी नहीं थी। पढ़ने में भी वह अक्सर कॉलेज में टॉप ही आती थी। शालिनी ने अपना फेसबुक पर अकाउंट बनाया अकाउंट बनाने के तीसरे दिन उसके पास अंकित सिंह नाम के लड़के की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। शालिनी अभी फेसबुक के बारे में ज्यादा जानती भी नहीं थी। इसलिए उसने अंकित की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद अंकित फेसबुक के माध्यम से ही हेलो हाय करने लगा। पहले तो शालिनी इन सब चीजों को इग्नोर करती रही लेकिन कुछ दिन बाद वह भी अंकित के साथ हेलो हाय करने लगी।

धीरे धीरे उन दोनों में दोस्ती हो गई। अब शालिनी रात में भी अंकित से चैट के माध्यम से बातें किया करती। शालिनी और अंकित की दोस्ती धीरे धीरे प्यार में बदल गई। 1 दिन अंकित ने शालिनी से मिलने के लिए कहा तो शालिनी ने साफ मना कर दिया। लेकिन वह रात भर अंकित के बारे में सोचती रही। अगले दिन जब एक बार फिर अंकित ने कहा तो शालिनी मना नहीं कर पायी और उसने अंकित से मिलने के लिए हां बोल दिया।

अंकित भी शालिनी के गांव से 6 किलोमीटर दूर स्थित गांव शिवगंज का रहने वाला था। अंकित एक दलित परिवार से था। उसके पिता खेती मजदूरी करके उसे पढ़ाते थे। अंकित भी स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। अंकित उसी स्कूल में पढ़ता था जिसमें शालिनी पढ़ती थी। लेकिन वह दोनों एक दूसरे को स्कूल में कभी भी जान नहीं पाए। शालिनी स्नातक के प्रथम वर्ष में थी और अंकित स्नातक के अंतिम वर्ष का छात्र था।

शालिनी ने फेसबुक पर जब अंकित से मिलने के लिए हां कह दी तो अंकित ने स्कूल से थोड़ी दूर पर ही एक खंडहर से मकान में मिलने के लिए कहा। शालिनी घर से स्कूल के लिए निकली और सीधे वहां पर पहुंची जहां पर दोनों का वादा हुआ था। अंकित वहां पर पहले से ही मौजूद था। शालिनी जब अंकित से मिली तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दिखने में अंकित बहुत ही खूबसूरत और हैंडसम था। इसलिए दोनों एक दूसरे से और भी प्यार करने लगे।

इसके बाद जब भी दोनों को मौका मिलता तो वह दोनों वही पहुंच जाते और बैठकर आपस में घंटों बातें करते हैं। 1 साल तक यह सिलसिला चलता रहा लेकिन अब समय आ गया था अंकित और शालिनी के बिछड़ने का, क्योंकि अंकित ने स्नातक की परीक्षा पास कर ली थी और वह शहर में जाकर पढ़ने वाला था। अंकित भी पढ़ने में बहुत ही अच्छा था। वह भी अपनी क्लास में अक्सर टॉप ही आता था। अंकित का जब रिजल्ट निकला तो शालिनी उसे देख कर खुशी से झूम उठी।

लेकिन जब उसे अंकित की जाने की खबर मिली तो वह पूरी तरह से दुखी हो गई। शालिनी ने अंकित को फोन किया और वही अपनी पुरानी जगह पर बुलाया। अंकित और शालिनी दोनों मिलते ही एक दूसरे के लिपट गए। शालिनी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अंकित ने उसे काफी समझाया लेकिन उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था।

अंकित ने शालिनी को बताया हम दोनों की दोस्ती या प्रेम कहानी बस यहीं तक थी। हम दोनों शादी भी नहीं कर सकते क्योंकि मैं एक दलित हूं और आपके पिता जमींदार हैं। शालिनी ने कहा इसमें दलित और जमीदार वाली बात कहां से आ गई। मैं तुमसे सच्ची मोहब्बत करती हूं। इसलिए मैं अगर इस दुनिया में जिंदा रहूंगी तो सिर्फ तुम्हारे लिए और मरूंगी तो भी सिर्फ तुम्हारे लिए। अंकित बहुत समझाया लेकिन शालिनी किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं हुई। उन दोनों के पास शादी करने का कोई विकल्प ही नहीं था, क्योंकि शालिनी के पिता किसी भी कीमत पर राजी नहीं हो सकते थे।

अंकित ने जब यह बात शालिनी को समझाई, तो शालिनी ने कहा कि हम दोनों बालिग हैं और दोनों अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं। अंकित ने कहा शालिनी अगर ऐसा कदम हम लोग उठाते हैं तो तुम्हारे पिता हमें और हमारे परिवार को पूरी तरह से खत्म कर देंगे। इसके बावजूद भी शालिनी किसी भी तरह तैयार होने को नहीं थी। आखिर हार कर अंकित ने भी उसकी हां में हां कर दी।

अगली 10 तारीख को दोनों ने घर से भागने का प्लान बनाया। 10 तारीख तक दोनों जब भी मौका मिलता उसी खंडहर मकान में बैठकर घंटों बातें करते और उसके बाद अपने अपने घर चले जाते। दोनों की प्रेम कहानी का ना तो अंकित के घर वालों को किसी तरह की खबर थी और ना ही शालिनी के परिवार वालों को भनक तक थी। सिर्फ कालेज की कुछ लड़कियां ही जानती थीं।

आखिर वह तारीख भी आ गई। दोनों ने कुछ कपड़े लिए और शालिनी ने अपनी मां के कुछ जेवर और पिता के कुछ पैसे एक बैग में भरे। रात के 1:00 बजे दोनों घर से निकल गए। अंकित पहले से ही शालिनी के घर के पास मौजूद था। घर से निकलने के बाद दोनों ने मुख्य रोड तक जाने के लिए सड़क का सहारा नहीं लिया बल्कि खेतों में होते हुए मुख्य रोड तक पहुंचे। इसके बाद दोनों ने बस पकड़ी और अपनी उस दुनिया में चले गए जहां सिर्फ प्रेम ही प्रेम होता है। इसके सिवा कुछ भी नहीं होता है।

सुबह जब शालिनी की मां जागी तो उसने शालिनी को तलाश किया लेकिन पूरे घर में शालिनी कहीं नहीं थी। उसने यह बात अपने पति को बताई। उसके पति के आंखों में खून सा बहने लगा। वह फिर गुस्से में एक बार अपने घर में शालिनी को ढूंढने गया लेकिन शालिनी तो वहां थी ही नहीं। इसलिए उसे भी निराशा ही हाथ लगी। गांव का जमीदार होने के नाते उस पर एक कलंक लगने जा रहा था। इसलिए वह पूरी तरह गुस्से में आकर कांप सा रहा था। उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था। धीरे धीरे सुबह की शाम हो गई लेकिन शालिनी का कोई पता नहीं लगा। अब तो सालनी के पिता के गुस्से की हद ही टूट गई थी।

शालिनी के पिता अवतार सिंह पुराने ख्यालों के थे। 21वीं सदी में जीने के बाद भी जात पात और छुआछूत में बहुत ज्यादा विश्वास करते थे। लेकिन आज के समय की पीढ़ी के बच्चे इन सब चीजों को ज्यादा नहीं मानते। सिर्फ वह लोग ही मानते हैं जिनके माता-पिता बहुत ही ज्यादा रूढ़ीवादी होते हैं। शालिनी भी खुले विचारों की लड़की थी। वह भी जात पात और छुआछूत में किसी तरह का विश्वास नहीं करती थी। हालांकि उसने कई दलितों पर अत्याचार करते हुए अपने पिता को अपनी आंखों से देखा था लेकिन वह पढ़े लिखी थी। दुनिया में सभी को समान रुप से मानती थी।

चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का व्यक्ति हो। वह उसे सिर्फ इंसानियत के नाते इंसान ही समझती थी। जात पात और छुआछूत उसके समझ में कभी नहीं आया लेकिन अंकित के साथ भागते समय वह यह भूल गई कि उसके पिता कितने जालिम किस्म के हैं। वह एक दूसरे को प्रेम करने को खुद के ऊपर एक कलंक समझ बैठेंगे और इसके लिए वह कुछ भी कर सकते हैं।

शालिनी के पिता ने सुबह होते ही अपने लोगों को स्कूल भेज दिया और शालिनी के बारे में छोटी सी छोटी जानकारी जुटाने के लिए कहा। 3 दिनों तक लगातार अवतार सिंह के लोग स्कूल में जानकारी जुटाते रहे और एक दिन एक लड़की ने शालिनी और अंकित की पूरी प्रेम कहानी के बारे में बता दिया। अवतार सिंह को जब इस बात की भनक लगी तो उसका और भी खून खौल उठा क्योंकि अंकित एक दलित व्यक्ति का लड़का था।

अवतार सिंह ने तुरंत अपने लोगों को अंकित के घर पर भेज दिया। अंकित अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता और माता बुजुर्ग थे। उनके लिए वह लाठी की तरह सहारा था। अवतार सिंह के लोग जब गांव पहुंचे तो उनकी मुलाकात अंकित के पिता रमई से हो गई। रमई ने बताया कि मेरा बेटा अंकित भी पिछले 4 दिनों से गायब है। इस बात से और भी पुष्टि हो गई की अंकित ही शालिनी को कहीं लेकर भागा है। अवतार सिंह के लोग रमई को अवतार सिंह की हवेली पर ले आए।

लोगों की भीड़ जमा थी। कुर्सियां पड़ी थी। जिन पर जमीदार और उसके कुछ खास लोग बैठे हुए थे। इसके बाद पास में ही जमीन में चादरें बिछी थी। जिन पर गांव के लोग बैठे थे। पास में ही जमीन पर अंकित का पिता रमई हाथ जोड़ कर बैठा हुआ था। पूरी पंचायत सी लगी हुई थी कुर्सियों पर बैठे हुए लोगों ने थोड़ी देर आपस में बातचीत की और फिर चादर पर बैठे लोगों से कहा किस बूढ़े व्यक्ति के लड़के की इतनी हिम्मत हो गई कि हम लोगों की बेटी पर नजर डाली है। इसलिए सबसे पहले इसे सजा दी जाए।

चादर पर बैठे लोग उठे और रमई को बुरी तरह से लात घूंसों से पीटने लगे। वह लोग रमई को तब तक मारते रहे जब तक उसके प्राण पखेरू नहीं उड़ गये। इसके बाद सभी लोग अपने अपने घरों को चले गए। तभी किसी ने जाकर रमई के घर में उसकी पत्नी माल्ती को इस बात की जानकारी दी।माल्ती दौड़ती हुई आई। उसने देखा कि रमई को जमींदार ने मार डाला लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी। इसलिए उसने अपने पति के शव को किसी तरह अपने घर तक पहुंचाया और उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

अवतार सिंह की आग अभी बुझी नहीं थी। वह लगातार शालिनी और अंकित को तलाश करता रहा लेकिन आज 5 साल बाद भी अवतार सिंह शालिनी को खोज नहीं पाया। शालिनी और अंकित इस समय कहां हैं। इस बात का किसी को नहीं पता लेकिन एक अहंकारी बाप ने दो प्रेमियों के प्रेम को कलंक समझकर एक मासूम को मौत के घाट उतार दिया था।

Urmila Mishra
248/C, Kurnool, Andhra pradesh

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