Truth Manthan

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अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 को 11 सितम्बर 1989 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया था, जिसे 30 जनवरी 1990 से सारे भारत में लागू किया गया। यह अधिनियम उस प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता हैं जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य नही हैं तथा वह व्यक्ति इस वर्ग के सदस्यों का उत्पीड़न करता हैं। इस अधिनियम मे 5 अध्याय एवं 23 धाराएँ हैं। अत्याचार के अपराध अत्याचार के अपराधों के लिए कई तरह के दंड का प्रावधान है।

तीन दिन की छुट्टी थी, इसलिए बच्चों को साथ लेकर मैं गांव चला गया। सोचा कि बच्चों का भी मन बहल जाएगा और गांव में परिवार के सभी लोगों से मिल भी अच्छी तरीके से लेंगे। माताजी बुजुर्ग हैं। इस लिए बार-बार देखने का मन भी करता है। गांव गया तो गांव के कई लोगों से मिला काफी बातें हुईं। हमारे गांव में लगभग सभी जाति के लोग रहते हैं और लगभग सभी प्रेम से ही रहते हैं। मगर उनके अंदर की मानसिकता अब भगवान जाने।

हमारे एक जाने-माने यादव जी मिलने आए काफी देर तक बातें होती रहीं। फिर उन्होंने एक शब्द बोल दिया की सरकार ने SC/ST Act के साथ जो काफी धनराशि पीड़ितों को देने के लिए कहा है वो गलत है। इस धनराशि के खातिर लोग इसका मिस यूज कर रहे हैं। मैंने भी पूछ लिया, क्या अपने ही गांव में SC/ST Act का कितने लोगों ने इसका दुरुपयोग किया है तो यादव जी जवाब नहीं दे पाए। मैंने कहा अच्छा अपने गांव के आसपास जितने भी गांव हैं उन गाँवों में में कितने लोगों ने SC/ST Act का मिस यूज किया है। इस पर भी यादव जी चुप्पी साधे रहे और कोई जवाब नहीं दे पाये।

मैंने कहा अच्छा अब तुम ही बता दो जिसने तुम्हें बताया है कि एससी एसटी के लोग SC/ST Act का दुरुपयोग कर रहे हैं। यादव जी सटाक से बोल पड़े कि ठाकुर साहब बता रहे थे कि वहां दूर गांव में यादव और यादव में लड़ाई हुई जिसमें एक यादव ने एससी के व्यक्ति को लेकर दूसरे यादव पर SC/ST Act लगवा दी। मैंने कहा आपने उनकी बातों को सत्य मान लिया। क्या उसे खोजा भी, बोले नहीं वह कह रहे थे। इसलिए हमने मान लिया। मैंने कहा इसीलिए आपका जमीर तक गुलाम हो चुका है। कोई कुछ भी कहे और उसे आप मान लें ये कैसे उचित है।

तब तक वही ठाकुर साहब वहीं आ गए। मैंने उनसे भी यह प्रश्न पूछ लिया तो उन्होंने सीना चौड़ा करके जवाब दिया कि हां उस गांव में ऐसा हुआ है। इत्तेफाक की बात उस गांव में मेरा एक परिचित दोस्त भी रहता था। मैंने कहा ठीक है मैं एक व्यक्ति से अभी फोन करके आप की सच्चाई का पता करता हूं। मैंने अपने दोस्त को फोन किया वह गांव पर ही था। मैंने उसे अपने परिचय दिया और फिर फोन उन ठाकुर साहब को थमा दिया। ठाकुर साहब ने जब उनसे पूछा कि क्या इस तरह की घटना हुई है तो उसने उसे पूरी तरह से नकार दिया। ठाकुर साहब से ज़िद जैसी करने लगे। हालांकि मेरा मित्र भी ठाकुर ही था। उसने कहा हमारे गांव से आपके गांव की दूरी लगभग 100 किलोमीटर के आसपास है। मैं अपने गांव में रहता हूं मुझसे अच्छी तरह आप कैसे जान सकते हैं।

इस पर ठाकुर साहब बोले नहीं मेरे मित्र ने मुझे बताया था कि आपके गांव में ऐसा हुआ है। उस दोस्त ने कहा कि एक व्यक्ति के कहने से आपने यह अफवाह फैलाने शुरू कर दी। ऐसा उचित नहीं है। इसके बाद उसने कहा मेरे यहां ना ही यादव जाति के लोग रहते हैं और ना ही इस तरह की कोई घटना घटित हुई है। इसके बाद मैंने उससे हालचाल पूछा और फोन को काट दिया। ठाकुर साहब अपना मुंह बनाकर चलने वाले थे। मैंने उनसे प्रश्न पूछ लिया कि आपको इस तरह की अफवाह उड़ाने में क्या मिलता है। ठाकुर साहब ने कहा नहीं मुझे सुनने को मिला था। इसलिए मैंने लोगों से कहा था। मैंने कहा बिना पुष्टि किए आपने लोगों में इस चीजों को फैलाने की कोशिश की इससे इन लोगों के दिमाग पर क्या असर पड़ेगा। यह भी तो आपको सोच लेना चाहिए।

मेरे इतना बोलने के बाद ठाकुर साहब ने दुम दवाई और चले गए। मैंने फिर यादव जी से पूछा कि आप पढ़े लिखे होकर भी इन लोगों की बात कैसे मान लेते हैं। बात मानना बुरी बात नहीं है लेकिन यह भी जानना जरूरी है कि वह बात कितनी सत्य है। आप उस बात को जिस जगह कहेंगे लोग उससे सच मानेंगे। जिससे लोगों के अंदर डर या भ्रम पैदा हो सकता है। इसलिए आपको सोच समझकर बोलना चाहिए और किसी बात को सुनने के बाद यह भी सोचना चाहिए कि सामने वाला क्या वास्तव में सच बोल रहा है।

इसके बाद फिर मैं 2 दिन तक गांव में रुका उसके बाद जो हकीकत मुझे सुनने को मिली मैं उसे सुनकर काफी हैरान था। दरअसल हुआ यह था कि उन्हीं ठाकुर साहब के सबसे छोटे भाई ने गांव के ही एक एससी जाति के व्यक्ति की बहू के साथ रेप किया था। जिसके चलते वह जेल में था। जिस पर एससी एसटी एक्ट के साथ साथ अन्य रेप की धाराएं भी लगाई गई थी। इसीलिए ठाकुर साहब पूरे गांव में इसी तरह के झूठे उदाहरण देते घूम रहे थे। जिससे कि सवर्ण वर्ग के लोग तो इसकी खिलाफत कर सके बल्कि साथ में अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग भी उनका साथ दे सके। SC/ST Act का क्या वास्तव में दुरुपयोग की जा रहा है। मैंने जो इसकी असलियत का पता लगाया फिर मैंने लोगों को समझाया कि आज तक मूर्ख बनते आ रहे हो और अब पढ़ने लिखने के बाद भी उन्हीं लोगों की बातों में आ जाते हो। मैंने कहा उनकी बातों को सुनना गलत नहीं है किंतु उनकी गलत बातों को लोगों में फैलाना बहुत ही गलत है। किसी भी बात को सुनने के बाद उस पर निर्णय जभी लें जब तक उस बात की पूरी तरह से पुष्टि ना कर ले। एक यादव जी कहने लगे वास्तव में आज भी हम लोग मूर्ख बन रहे हैं और ऐसे लोग मूर्ख बनाकर फायदा उठा रहे हैं।

मैंने कहा किसी कमजोर और असहाय व्यक्ति को अगर कोई सहारे के लिए छड़ी दे दी जाए। और कहा जाए कि रास्ते में निकलते समय इसे अपने साथ रखना और छड़ी का इस्तेमाल अपने बचाव में करना। ताकि लोग यह समझें कि उस व्यक्ति के पास छड़ी है। अगर उसे हम गलत तरीके से परेशान करेंगे तो वह उस छड़ी से हमारे ऊपर वार कर सकता है। क्या किसी गरीब व्यक्ति को अपनी सुरक्षा करने का भी अधिकार नहीं है और वह भी कानूनी तौर पर SC/ST Act भी एक ऐसा कानून है जो ऐसे ही लोगों को लिए है जो पूरी तरह से असहाय हैं और जिन्हें आज नहीं सैकड़ों सालों से परेशान किया जा रहा उनके लिए यह कानून बनाया गया है।

यादव जी की भी समझ में आ चुका था, वह कहने लगे कि मैं तो इसका विरोध कर रहा था मगर मैं अब पूरी तरह से समझ गया कि अगर मैं किसी के साथ भाई चारे के साथ रहूंगा तो वह मुझ पर इस तरह की एक्ट क्यों लग लगवाएगा और किसी भी इंसान के ऊपर क्यों लगाएगा हां जो उसे परेशान करेगा उसके संविधानिक अधिकारों को हनन करेगा वास्तव में उन लोगों के ऊपर इस तरह की एक्ट का लगना बहुत जरूरी है ताकि हमारे समाज के वह लोग भी सर ऊंचा कर के जी सकें जिन्हें सैकड़ों साल से दबाकर और कुचल कर रखा गया है। इतना कहकर यादव जी भी अपने घर चले गए।

मैंने भी घर आकर खाना खाने लगा। इसके बाद भी मेरे दिमाग में वह बात घूम रही थी कि यादव जी पढ़े लिखे होने के बाद भी ऐसे लोगों की बातों पर विश्वास किए हुए थे जो पढ़े लिखे ज्यादा नहीं हैं किंतु भ्रम फैलाने और आपस में लड़ाने का काम करते हैं। इसके बाद फिर मैं 4 दिन तक और गांव में रुका बच्चों को मैंने शहर भेज दिया किंतु मैं गांव में घूम घूम कर इसे चीज का पता करता रहा कि क्या वास्तव में एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग किया जा रहा है। मुझे कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिसने इस तरह की बात कही हो मैं समझ चुका था कि इससे सबसे ज्यादा तकलीफ सामान्य वर्ग के लोगों को ही है क्योंकि अब वह दबे कुचले लोगों को आसानी से परेशान नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उन्हें परेशान करने में उनको आनंद आता है।

इसलिए अब इस तरह की अफवाह उड़ा कर उनके इस हथियार को भी छीनने की कोशिश कर रहे हैं और साथ ले रहे थे एससी एसटी के ही बड़े भाइयों का जैसे यादव किसान इत्यादि। मैंने लोगों मैं इस बात का भी जिक्र किया कि जब भी कोई एससी एसटी एक्ट ही नहीं कोई भी इस तरह की अफवाह फैलाता है तो कम से कम उसकी जांच अवश्य कर लो उसके बाद उसे दूसरे व्यक्ति से कहो ताकि समाज टूटने ना पाए हमारा देश भारत सदैव एकता और अखंडता में विश्वास रखने वाला है। जिसे कुछ चुने हुए लोग तोड़ना चाहते हैं उनकी कामयाबी को नाकाम करो और भारत को पुनः मजबूत और शक्तिशाली बनाओ।

अगर इसी तरह इन लोगों के बहकावे में आते रहोगे और अपने ही लोगों को सताते रहोगे तो उसका परिणाम उनको तो मिलेगा ही बाद में आपको भी इसी तरह तोड़ कर इसी तरह के परिणामों का सामना करना पड़ेगा। लोगों ने मेरी बात को खूब सराहा कहां आप सही बिल्कुल सही बोल रहे हैं। कुछ लोग ही हमारे समाज में एक ऐसी गंदगी हैं जो समाज को सिर्फ और सिर्फ तोड़ने का काम करते हैं। मुझे अब एहसास हो चुका था कि गांव के लोग अब पूरी तरह से समझ चुके हैं। इसलिए अगले ही सुबह मैं फिर शहर लौट आया।

Vimal Kumar Pandey
Shekhpur, Pandiyana, Khiri
Uttar Pradesh
Social Thinker and Independent Writer

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