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Slavery – The Fruit of Stupidity The Truth Story of the Present Time (गुलामी – मूर्खता का फल वर्तमान समय की सच्ची कहानी)

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Nobody likes slavery. Whether a person is rich or poor does not want to be a slave. The ruler always makes a human being his slave under some conspiracy. The victims of conspiracy are greedy and blind devotees and they are the first to be enslaved. There are some people who like to die from slavery. This story can save you from slavery only in the current circumstances. Read it and avoid both social and mental slavery.

एक बहुत बड़ा राज्य था। जिसका नाम जमुना नगर था। जमुना नगर बहुत बड़ा राज्य था। जमुना नगर में एक मूर्ख और दुष्ट प्रकृति का राजा राज्य करता था। उस राजा का नाम नरक चंद था। राजा इतने बड़े राज्य पर राज करने मैं सक्षम नहीं था। किंतु लोगों को मूर्ख बना कर वह राजा बन बैठा था। राजा ने जनता से बड़े-बड़े वादे किए और जनता उसके लुभावने बातों में आ गई। राज्य की सभी जनता ने मिलकर नरक चंद को राजा बना दिया। नरक चंद राजा तो बन गया लेकिन वह पूरी तरह से मूर्ख था।

वह जनता को लगातार मूर्ख बनाता आ रहा था लेकिन जनता से ही कुछ लोग ऐसे थे जो राजा के पूरी तरह से अंध भक्त थे। वह राजा पर आंखें बंद करके विश्वास करते थे। अगर उनके सामने राजा नरक चंद की कोई थोड़ी सी बुराई भी कर देता तो वह झगड़ने के लिए तैयार हो जाते थे। इसके अलावा राजा नरक चंद ने अपनी एक स्पेशल टीम बना रखी थी। वह टीम सिर्फ राजा के सिंहासन को बचाने के लिए ही दिन रात नई नई मूर्खतापूर्ण खोजें करती रहती थी।

चार साल तक जनता ने राजा का शासन देखा लेकिन राजा द्वारा किया गया एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। जिससे जनता अब राजा से नाराज होने लगी। जब राजा नरक चंद को इस चीज की खबर लगी तो उसके होश उड़ गए। राजा ने तत्काल अपनी टीम को बुलाया और बताया कि हमारे राज्य की जनता बहुत ही गुस्से में हैं। राजा की टीम के सदस्यों ने राजा को अवगत कराया कि महाराज पहली बात तो यह है कि आपके कुछ ऐसे अंध भक्त हैं जो किसी कीमत पर आपका बुरा सोचने का सपना तक नहीं देखेंगे। इसके अलावा वही लोग अन्य लोगों को गुमराह भी करते रहेंगे। इसलिए अभी आपको किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

राजा नरक चंद बहुत ही खुश हो गया। वह फिर अपनी भोग विलासिता में लिप्त हो गया। 2 साल बाद फिर राज्य की जनता ने आवाज उठानी शुरू कर दी। राजा नरक चंद ने तुरंत अपनी टीम को बुलाया उसकी टीम ने बताया जी महाराज इस बार वास्तव में जनता आप से नाराज हैं। इसे खुश करने के लिए कुछ ना कुछ करना होगा। इसके लिए राजा नरक चंद की टीम ने एक सुझाव बताया। टीम के सदस्यों ने राजा को बताया कि हमारे राज्य की जनता बहुत ही गरीब है और उसके खाने तक के लाले पड़े हुए हैं।

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इसलिए हमें थोड़ी मदद कर देनी चाहिए। राजा ने जितनी भी जनता गरीब थी सभी जनता में 5-5 सौ रुपए तत्काल बंटवा दिए। राजा की फिर जय जयकार होने लगी। इसके बाद राजा पुनः आपने भोग विलास में लिप्त हो गया। उसने राज्य के जो थोड़े बहुत अमीर लोग थे उन पर बड़ा कर लगा दिया। अब मीडियम अमीर लोगों को बहुत ही परेशानियां होने लगी और उन पर कोई ध्यान नहीं दिया। बल्कि अन्य छोटे-छोटे राज्यों को मदद करनी शुरू कर दी ताकि वह छोटे राज्य समय पर उसके लिए अच्छी पूंजी खर्च कर सकें।

थोड़े दिन तक सब कुछ सामान्य रहा लेकिन इसके थोड़े दिन बाद जनता फिर भूखों मरने लगी। इसलिए जनता में आक्रोश आ गया लेकिन राजा नरक चंद बहुत ही बुद्धिजीवी था। इस बार उसने हर गरीब परिवार को 1-1 हजार रुपए प्रति 2 माह पर देने शुरू कर दिए। इतना सुनने के बाद जनता खुशी से पागल हो गई अब उनके हर 2 महीने बाद एक हजार रुपए मिल जाते। जिससे वह अपनी खाने-पीने की सामग्री खरीद लेते और उनका आराम से समय कट जाता। उन्हें कोई काम करने की जरूरत नहीं थी। वह पूरी तरह से आलसी हो गए थे।

उनके पढ़े-लिखे बच्चे भी भिखारियों की तरह घूमते रहते हैं लेकिन उनके लिए भी कोई काम नहीं था। इसके बावजूद भी जनता राजा नरक चंद से बहुत ही खुश थी। क्योंकि उन्हें बिना कुछ किए ही हर 2 महीने बाद ₹1000 मिल जाते थे। जिससे उनकी लाइफ चंगी कट रही थी। जनता भी पूरी तरह मूर्ख थी। वह आपस में राजा के नाम पर लड़ती रहती थी। किसी को भी रोजगार नाम की कोई चीज नहीं मिली थी। राज्य के अच्छे पढ़े लिखे लोग भी बेरोजगार घूम रहे थे।
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अगर वह किसी तरह का राजा का विरोध करते तो जिन लोगों के खाते में 1-1 हजार रुपए आता था। वह उन युवाओं का जमकर विरोध करते और दिन रात राजा का गुणगान करते थे। उस राजा ने राज्य के समस्त लोगों को पूरी तरह से आलसी और मूर्ख बना कर रखा था। अब राजा ने राज्य की अच्छी-अच्छी चीजों को छोटे-छोटे राज्यों को बेचना शुरू कर दिया। जिसके बदले में अच्छी रकम मिलती। राजा उसे अपने खाते में जमा करता था। महंगाई भी इतनी बढ़ गई कि एक बार फिर जनता त्राहि-त्राहि करने लगी। मजबूर होकर राज्य की जनता को एक बार पुनः राजा के खिलाफ आवाज उठानी पड़ी लेकिन अब तक राजा ने कई राज्य के नियम और कानून बदल दिए थे।

जिनके चलते जनता अगर किसी तरह का आंदोलन करती तो राजा की सेना उस जनता को लाठियों से जमकर पीटती थी। राज्य में कोई भी व्यक्ति अब राजा के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता था। राजा ने अपना तानाशाह राज्य कायम कर रखा था। जनता भूखों मर रही थी। मगर राजा को किसी तरह की कोई फिक्र नहीं थी। हार कर एक बार पूरे राज्य की जनता ने राजा के प्रति आक्रोश जताया तो राजा ने समस्त जनता को ही गुलाम बना लिया। अब सिर्फ पूरी जनता राजा के नियम कानून से ही चलती थी सिर्फ लोगों को जीने और खाने को दिया जाता इसके बदले दिन रात उन से काम लिया जाता था। इस तरह वह राजा अपना राज्य करता रहा। अब उसे गद्दी से हटाने वाला और उसके खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। सिर्फ एक एक हजार रुपए के लालच ने पूरे राज्य की जनता को नाकारा बना दिया था।

जिसके चलते आज पूरी जनता को गुलामी झेलनी पड़ रही थी। अब राज्य की जनता भूखों मर रही थी किंतु छोटे-छोटे राज्य बहुत अमीर बन चुके थे क्योंकि उन छोटे-छोटे राज्यों ने राजा के आगे पीछे रहने का काम किया था। इसलिए उस मूर्ख राजा ने जनता का खजाना उन छोटे-छोटे राज्यों को दे दिया था ताकि अगर जनता कभी उसके प्रति विरोध करें तो वह छोटे-छोटे राज्य उसकी मदद कर सके। अब तो सारी ही समस्याएं खत्म हो गई थी क्योंकि राज्य की पूरी जनता राजा की गुलाम बन चुकी थी और अब राजा जो आदेश देकर वही होता था। अब जनता पछता रही थी कि शायद हमने राजा का विरोध कर अपने लिए रोजगार और नौकरियां ली होती। लेकिन हमने लालच बस 1000 रुपए लिए जिसका खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है और शायद इसका असर हमारी कई पीढ़ियों के ऊपर तक पड़ेगा ।
राजा नरक चंद्र की तरह ही इस समय हमारे देश भारत के भी हालात हैं। हमारे देश की जीडीपी -23.9 हो गई है और माननीय मोदी जी द्वारा प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत दिए जा रहे 2000 रुपए से लोग संतुष्ट हैं। लेकिन हमारे देश में बेरोजगारी इतनी ज्यादा बढ़ गई है जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद भी आज भी कुछ अंध भक्त ऐसे हैं जो मोदी शासन की तारीख करते दिखाई दे रहे हैं।

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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की दलितों सहित अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों की खुलेआम खिलाफत की जा रही है। नौकरी देने की बजाय नौकरी कर रहे लोगों को मनमाने तरीके से निकाला जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों किया जा रहा है। जब एक 70 साल का प्रधानमंत्री पूरे देश को चला सकता है तो क्या एक 60 साल की उम्र का व्यक्ति सिर्फ अपना काम नहीं कर सकता है लेकिन सरकार अपनी पहले से ही बनाए रणनीति के अनुसार मनमाने तरीके से रिटायर कर रही है।

चीन जैसे देश हमारे देश की सीमाओं पर कब्जा किए हुए हैं। लेकिन उनकी बात नहीं की जा रही क्योंकि उनसे टक्कर लेना आसान नहीं है। चीन ही नहीं पाकिस्तान भी हमारे देश पर घात लगाए हुए बैठा है। जैसे ही मौका मिलेगा पाकिस्तान भी हमारे देश पर हमला कर सकता है। हमारे देश के रोजगार पूरी तरह से गायब हो गए हैं। आदमी एक एक दाने को तरसने लगा है। गरीबों के तो हालात ऐसे हैं जिनकी कल्पना नहीं की जा सकती है।

महंगाई ने आम इंसान ही नहीं समस्त इंसानों की कमर तोड़ रखी है। इतना पैसा होने के बावजूद भी देश के हालात बहुत ही खराब है। कई सरकारी सेक्टरों का निजी करण कर दिया गया है और बहुत से सेक्टरों का निजीकरण किया जा रहा है। अगर इसी तरह से जनता तमाशा देखती रही तो वह दिन दूर नहीं जब भारत की जनता भाजपा सरकार की पूरी तरह से गुलाम हो जाएगी और हमारा देश भी भाजपा का गुलाम हो जाएगा। इसलिए समझदार लोगों को 2000 रुपये का लालच छोड़कर नौकरी कऔर रोजगार सरकार से मांगने चाहिए जो उनके बच्चों के भविष्य के लिए बहुत ही आवश्यक है।

लालच हमेशा बुरा होता है और अगर इसी तरह हमारे देश के लोग लालची और स्वार्थी बने रहे तो वह दिन दूर नहीं जब पूरा का पूरा देश गुलाम हो जाएगा। सारे नियम और कानून सिर्फ भाजपा सरकार के होंगे जिन्हें अनुसूचित जाति और अदर बैकवर्ड जातियों का विशेषकर जमकर शोषण होगा। मुस्लिमों का शोषण जारी है और होता रहेगा क्योंकि भाजपा सरकार सिर्फ हिंदू और मुस्लिम पर लड़ाई लड़ती है। इसके अलावा टाइम मिलते ही अपनी नई रणनीति खेल देती है। इतना ही नहीं भाजपा सरकार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान को पूर्ण रूप से बदलने की कोशिश कर रही है। अगर अभी भी नहीं लोग जागे तो वह दिन दूर नहीं जब सारा का सारा देश भाजपा की गुलामी करता दिखाई देगा।

इतना ही नहीं हमारे देश में सैकड़ों ऐसी कम्पनियां है जो विदेशी है और उन्हें लगभग 99 प्रतिशत लोग भारतीय समझते हैं किन्तु वह विदेशी है। उन विदेशी कंपनियों को किसी तरह का कोई संकट नहीं है और अच्छा खासा लाभ कमा रहीं है। हमारे देश की कम्पनियां इतनी ज्यादा घाटे में हैं कि उन्हें बेचा जा रहा है। उन कंपनियों में काम कर रहे लोगों को निकाला जा रहा है। विदेशी कम्पनियां मालामाल हो रहीं और देशी कम्पनियां बर्बाद हो रहीं हैं। इसके बावजूद भी हमारे देश को आत्मनिर्भर किये जाने की बात की जाती है। मोदी सरकार में हमारे देश का भविष्य क्या होगा इसके बारे में कल्पना करने से भी डर का आभास होने लगता है।
धन्यवाद!

Sanjeev Mishra
249/32, Near JBOP IC, Haroa
Kolkata, West Bengal


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1,694 thoughts on “Slavery – The Fruit of Stupidity The Truth Story of the Present Time (गुलामी – मूर्खता का फल वर्तमान समय की सच्ची कहानी)”

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