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हमारे देश में जब से भाजपा की सरकार बनी है। तब से राम राज्य लाने की बात की जा रही है। राम राज्य के चक्कर में देश के ऐसे हालात हो गए हैं कि पढ़े लिखे लोग भी फुटपाथ पर भीख मांगते दिखाई दे रहे हैं। हमारे सरकारी संस्थाएं प्राइवेट कर दी गई हैं। 2 करोड़ रोजगार हर वर्ष देने वाली सरकार ने अभी तक 50,000 से ज्यादा लोगों की नौकरियां छीन ली है। जबकि बेरोजगारी इतनी ज्यादा बढ़ गई है इसका वर्णन नहीं किया जा सकता। जीडीपी -23.9 हो गई है। पूरे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।

रामराज्य की बात करने वाली भाजपा सरकार को अब रामराज्य नहीं याद आ रहा है। दलितों और मुसलमानों पर भारी संख्या में जुल्म किए जा रहे हैं। लोगों को दिनदहाड़े कत्ल किया जा रहा है। गोलियों से भूना जा रहा है। इतना ही नहीं बहू बेटियों की इज्जत को भी लूटा जा रहा है। क्या यही रामराज्य है ? अगर ऐसा ही रामराज्य होता है तो इस रामराज्य को कौन पसंद करेगा। कौन चाहेगा इस तरह का रामराज्य आए। महंगाई खत्म करने की बात करने वाली भाजपा सरकार में इतनी ज्यादा महंगाई हो गई है कि आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। पेट्रोल और डीजल के दामों में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी कर दी गई जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं।

अब हम थोड़ी बात रामराज्य पर भी कर लेते हैं। सतयुग में राम का जन्म हुआ था। क्या उस समय दलितों और गरीबों पर जुल्म नहीं किए जाते थे। राम को भगवान विष्णु का अवतार बताया जाता है। क्या भगवान के पास दूरदर्शिता नहीं होती है ? अगर दूरदर्शिता नहीं है तो उसे कैसे भगवान मान लिया जाएगा। मैं उसी के कुछ उदाहरण बताने जा रहा हूं।

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जब राम बनवास में थे उस समय एक राक्षस रूपी मृग के पीछे अपनी पत्नी सीता के कहने पर उसकी हत्या करने को चले गए थे। भगवान होते हुए क्या उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि वह मृग एक राक्षस है। इतना तो सभी जानते हैं कि सोने का मृग कैसे हो सकता है। आज के समय में अगर बच्चे से भी पूछा जाए तो वह भी इसका जवाब दे देगा कि सोने का हिरण होना असंभव बात है। लेकिन यह छोटी सी बात भगवान कहे जाने वाले राम के समझ में क्यों नहीं आई। दूसरी बात क्या अपनी पत्नी की शोभा बढ़ाने के लिए किसी जानवर की हत्या करना उचित है। इंसान के लिए ऐसा हो सकता है मगर भगवान के लिए कदापि ऐसा उचित नहीं है।

अगर राम भगवान थे तो उन्हें इस बात का पता जरूर होना चाहिए था। इसके अलावा भगवान होते हुए भी राम इस बात को नहीं जान पाए की वह हिरण एक राक्षस है और अगले ही पल उनकी पत्नी का अपहरण होने वाला है। क्या इतनी दूरदर्शिता राम के पास नहीं थी ? अगर नहीं थी तो उन्हें कैसे भगवान माना जा सकता है। सुग्रीव से मित्रता करते समय बालि को राम ने धोखे से मार दिया। क्या उनके पास इतनी शक्ति नहीं थी जो बालि से लड़ कर उसे मार सकते। अगर बालि गलत था तो उसे सरेआम मारना कोई गलत बात नहीं थी। मगर धोखे से मारना भगवान के लिए कैसे उचित हो सकता है।

जब राम भगवान थे तो उन्हें इस चीज का पता नहीं चल सका कि सीता का हरण किसने किया है। इसलिए पशु पक्षियों और जंगली जानवरों से पूछते घूमते रहते हैं। और पूंछते है कि क्या तुम ने सीता को देखा है ? ऐसे व्यक्ति को भगवान कहा जा सकता है। अगर राम वास्तव में भगवान थे तो लंका में जाकर सीधे रावण को क्यों नहीं खत्म किया। क्यों बानरों की मदद लेनी पड़ी। अपने स्वार्थ के लिए लाखों की संख्या में बंदरों को मौत के घाट युद्ध में उतरवा दिया। क्या ऐसे व्यक्ति को भगवान माना जा सकता है ? इसके बाद किसी भी आदमी के भाई को अपने बस में करने के बाद उसकी हत्या करना यह कहां की इंसानियत है। क्या भगवान ऐसा ही करता है। भगवान जब खुद अपनी पत्नी पर विश्वास नहीं कर पाता है तो वह लोगों के लिए भगवान कैसे बन सकता है।

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एक आम आदमी के कहने पर अपनी गर्भवती पत्नी को जंगल में भेज देना कहां की इंसानियत है। सभी परीक्षाओं के बाद भी सीता को जंगल भेज दिया क्योंकि राम को विश्वास ही नहीं था कि सीता राम से गर्भवती हुई हैं या रावण से। अगर राम भगवान ही थे तो उन्हें किस बात का डर था। एक ब्राह्मण के कहने से एक मासूम ऋषी को मौत के घाट स्वयं उतार दिया। क्या उसके मंत्र जाप करने से राम के राज्य में आपदा आ सकती थी। अगर ऐसा ही था तो राम को भगवान कैसे माना जा सकता है। इसके बाद सीता को जब जंगल में भेजा गया तो सीता से एक पुत्र का जन्म हुआ लेकिन दूसरा पुत्र कहां से आ गया। क्या ऐसा संभव है कि किसी लकड़ी या कूड़े से बच्चे को बनाया जा सकता है ? अगर इतनी ही उस समय के ऋषि-मुनियों में ताकत थी तो उन्हें श्रृंगी ऋषि से डर क्यों उत्पन्न हुआ और उन्हें राम द्वारा क्यों मरवा दिया।

अगर ऐसा ही रामराज होता है तो मैं तो ऐसे राम राज्य को लाने के कभी भी पक्ष में नहीं रहूंगा। जहां इंसान को इंसान नहीं माना जाता है। चार चार वर्णों में बांटा जाता है। महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं दिया जाता। ऐसे रामराज्य का क्या मतलब है। आज हमारे देश की महिलाएं देश में ही नहीं विदेशों में भी हमारे देश का नाम रोशन करती हैं। अगर रामराज्य होता तो क्या वह ऐसा कर पातीं। राम राज्य में किसी भी महिला को पढ़ने लिखने का अधिकार नहीं था। मनुस्मृति के अनुसार महिलाओं और शूद्रों को पढ़ने का अधिकार नहीं है। ऐसे रामराज्य से क्या देश का भला हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को भगवान मान लेना जो स्वयं अपना निर्णय भी स्वेच्छा से नहीं ले सकता क्या उचित है।

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जब राम को भगवान ही माना जाता है तो उनकी पूरी कहानी में कहीं भी दूरदर्शिता का वर्णन क्यों नहीं किया गया। शास्त्रों के अनुसार भगवान सब कुछ देखता है। चाहे वह भूतकाल का हो वर्तमान काल या फिर भविष्य काल। राम को यह सब क्यों नहीं दिखाई दिया। अगर रावण वास्तव में पापी और अत्याचारी था तो उसे मारने के लिए यह रास्ता ही क्यों उचित लगा की उसने सीता का हरण किया और उसे मार दिया गया। इस समय क्या ऐसा किया जाता है। केवल कोई किसी की पति का हरण कर ले तो उसे मृत्युदंड दे दिया जाएगा। इसका कारण यह भी हो सकता है की वह स्त्री अपनी स्वेच्छा से भी दूसरे पुरुष के साथ जा सकती हैं।

रामराज्य का बखान करने वाली भाजपा सरकार इसी तरह से महिलाओं और शूद्रों (अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जनजाति) के उनके पूरे अधिकार छीन कर उन्हें पुनः गुलाम बनाना चाहती है। इसी को रामराज्य माना जाएगा। क्या इसीलिए पूरा देश रामराज्य लाने के इंतजार में बैठा है। अगर इस इंतजार में बैठा है तो हमारे देश की 85% आबादी गुलामी की जिंदगी जीने के लिए मजबूर हो जाएगी। शूद्रों को इस बात को सोचना चाहिए और महिलाएं जो किसी भी जाति या धर्म की हो उनको भी इस बात पर जरूर सोचना चाहिए। क्योंकि राम राज्य में किसी भी महिला को स्वतंत्र रूप से जीने की आजादी नहीं थी। पढ़ने की आजादी नहीं थी। अगर ऐसा ही राम राज्य लाने की कल्पना की जा रही है तो महिलाओं और शूद्रों को इसका विरोध जरूर ही करना चाहिए। ऐसा राम राज्य शूद्रों और महिलाओं के लिए भाजपा का इन लोगों को गुलाम बनाने का षडयंत्र है।

Pooja Valmiki
Mumbai, Maharashtra
Independent writer

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