Truth Manthan

Salvation and Set of Troubles मन को शांति देने वाली दो कवितायें

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Everyone attains salvation but no one tries to improve their deeds. Moksha is nothing, it is called Moksha to succeed and die in life. Troubles in life remain. Sometimes it comes in which human being gets stuck in the scene of troubles and only the person who goes through these troubles is successful in the world.

मुसीबतों का मंजर

उम्र की शाम कब आई, कुछ पता ही न चला

कुर्सियां हो गईं खाली, रंगमंच में न कोई मिला.

वक्त जो कम था, सोंचा सफर का हिसाब कर लें

मेरे हिस्से में आये कम, उधार ही ज्यादा निकले.

नंगे – भूखों को जितना दिया, दुआएँ उनसे ज्यादा मिलीं

पोंछे जिनके आंसू, मुस्कुराहट दिखी खिली-खिली.

बड़ी ख्वाईश थी, सीने से लगाने की एक गुलाब की

गुलाब तो बस बहाना था, वो तबस्सुम थी जनाब की.

सोंचा था, फूलों से लदकर शान से मंजिल को जाएंगे

वक्त बदला, रहे हम अकेले, अब हाथ भी न मिला पाएंगे.

मौसम बदलने से यहाँ की फिजां बदल जाती है

न पूछो इन्सान की, किस्मत तक दगा दे जाती है.

दिल दिया दिलवर को, उसके छिपे खंजर को नहीं देखा

चलते रहे कांटों पर, मुसीबतों का मंजर नहीं देखा.

अपने छूटे मानो जग ही छूटा, जमाना कैसा आ गया

सहमे लोग घरों में दुबके, बहाना कोरोना का छा गया.

फनां हो जाएं हसरतें हमारी, हयात में रह क्या जाएगा

रहे महरुम आगोश से तेरे, एक हाफिजा साथ रह जाएगा.

अनुज सिन्हा, नोयडा, उत्तर प्रदेश

मोक्ष

मन व्यथित है मेरा,वियोग से भरा हुआ

प्रफुल्लित हो जाऊं प्रभु,उस गांव की ओर ले चलो

भटका हुआ मुसाफिर हूं, मंजिल नहीं आती नजर

मार्गदर्शन करो मेरा, सुमार्ग पर ले चलो

डर जाता हूं मैं,अपने मन के विचारों से

अपने ही अंधेरों में घर जाता हूं मैं कब से

तुम दीप जलाकर ज्ञान का, प्रकाश की ओर ले चलो

रिश्तों में जकड़ गया हूं,भावनाओं की बेड़ियों में बंध

सच और झूठ के तराजू में खुद को तोलता हूं रोज

अचेतन हो गई आत्मा ,टांडव मचाता है चित् मेरा

आत्मा को चेतनता दो, परम सत्य की ओर ले चलो

खुद से आगे सोच सकूं मैं, अपना स्वार्थ छोड़ सकूं

अपने अंतरण की सुनो सद्भाव का बीज बो सकूं मैं

प्रेम की नये कुसुम खिलें, ऐसे गुलशन में ले चलो

हे जगत दाता, हे दीनदयाल,

नैया तुम्हारे हाथों में ,पतवार तुम्हारे हाथ में

कब से सौप दिया मैंने यह भार तुम्हारे हाथों में

मेरे कर्मों का लेखा जोखा है तुम्हारे हाथों में

मुक्त कर दो, मृत्यु जीवन के चक्रव्यूह से

मोक्ष की तरफ ले चलो।

पूजा अग्रवाल
लेखक, मथुरा आकाशवाणी में सक्रिय

 


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