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कानपुर के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर पर उठते सवाल

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कानपुर में दबिश देने गए आठ पुलिसकर्मियों की ह्त्या करने वाले अपराधी विकास दुबे का पुलिस ने उज्जैन से लाते समय कानपुर के भौती के पास एनकाउंटर कर दिया। पुलिस के अनुसार जिस गाड़ी में विकास दुबे बैठा था वह गाड़ी कानपुर के पास भौती के निकट पलट गई। जिसमे विकास दुबे सहित कई पुलिसकर्मियों को चोट भी लगी। इस मौके का फायदा उठाते हुए विकास दुबे इंस्पेक्टर रमाकांत का रिवाल्वर लेकर भागने लगा। इस पर मौजूद पुलिस ने पहले विकास दुबे से सरेंडर करने करने को कहा तो उसने फायरिंग करनी शुरू कर दी। इसी जवाबी कार्यवाही में पुलिस द्वारा विकास दुबे मारा गया।

अब सवाल ये उठता है कि क्या किसी अपराधी को गिरफ्तार करने के बाद उसे हथकड़ी नहीं पहनाई जाती है। विकास दुबे जैसे अपराधी को स्वतन्त्र तरीके से क्यों लाया जा रहा था। अगर विकास दुबे को हथकड़ी लगी थी या हाथ बंधे थे तो वह किसी की रिवाल्वर कैसे छीन सकता है। इसके अलावा एक गाड़ी पलटने के बाद अन्य गाड़ियों में मौजूद पुलिसकर्मी जरूर पलटी गाड़ी से उसमें बैठे पुलिसकर्मियों के निकलने से पहले जरूर पहुँच गए होंगे। इस परिस्थिति में विकास दुबे किसी की गन कैसे छीन सकता है।

आज तक के अनुसार उसके संवाददाता अरविंद ओझा शुरुआत से ही पीछा कर रहे थे। लेकिन घटना से कुछ दूर ही रोक लिया गया और 10 मिनट बाद छोड़ा गया। संवाददाता अरविंद ओझा जब भौती के पास पहुंचे तो वहां का मंजर ही अलग था। एक SUV कार पलटी पड़ी थी और विकास दुबे को अस्पताल भेजा जा चुका था।

NDTV के अनुसार- मौके पर एकत्र भारी संख्या में जमा भीड़ ने पूछतांछ में बताया कि गाड़ी के एक्सीडेंट की कोई आवाज नहीं सुनाई दी किन्तु हाँ गोलियां चलने की आवाज जरूर सुनाई दी. जिसके चलते यहां पर भारी संख्या में लोग जमा हो गए .
सोशल मीडिया पर इसे फेक एनकाउंटर बताया जा रहा है। सपा के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा है- ‘दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है।’


इसके अलाबा बसपा प्रमुख मायावती सहित कई विपक्षी पार्टियों ने इस घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। मायावती ने 9 जुलाई को ट्वीट करते लिखा-कानपुर-काण्ड का दुर्दान्त अपराधी विकास दुबे को काफी लम्बी जद्दोजहद के बाद अन्ततः मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्त में लिए जाने के बाद अब इसके तमाम आपराधिक सांठगांठ व माफियागिरी आदि का पर्दाफाश होने का यूपी व देश की जनता को काफी इन्तजार है।

इतना ही नहीं बल्कि जनता को इस बात की भी प्रतीक्षा है कि विकास दुबे के साथ-साथ उसके जघन्य अपराधों सेे जुड़े व सम्बंधित सभी सरकारी व राजनीतिक संरक्षकों एवं षडयंत्रकारियों को भी उत्तर प्रदेश सरकार जल्द से जल्द सख्त सजा जरूर दिलाए।

10 जुलाई को बसपा सुप्रीमों नें ट्वीट करते हुए लिखा –कानपुर पुलिस हत्याकाण्ड की तथा साथ ही इसके मुख्य आरोपी दुर्दान्त विकास दुबे को मध्यप्रदेश से कानपुर लाते समय आज पुलिस की गाड़ी के पलटने व उसके भागने पर यूपी पुलिस द्वारा उसे मार गिराए जाने आदि के समस्त मामलों की माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

यह उच्च-स्तरीय जाँच इसलिए भी जरूरी है ताकि कानपुर नरसंहार में शहीद हुए 8 पुलिसकर्मियों के परिवार को सही इन्साफ मिल सके। साथ ही, पुलिस व आपराधिक राजनीतिक तत्वों के गठजोड़ की भी सही शिनाख्त करके उन्हें भी सख्त सजा दिलाई जा सके। ऐसे कदमों से ही यूपी अपराध-मुक्त हो सकता है।

सपा के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 9जुलाई को ट्वीट करते हुए लिखा है- ख़बर आ रही है कि ‘कानपुर-काण्ड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है. अगर ये सच है तो सरकार साफ़ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ़्तारी. साथ ही उसके मोबाइल की CDR सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके.

10 जुलाई को अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा –दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है.

एक अन्य Jaishiv Gupta व्यक्ति ने ट्वीट करते लिखा है –राजनेताओं को बचाने के लिए फेक एनकाउंटर किया गया . इसके अलावा कई बॉलीवुड ऐक्ट्रेस और एक्टर्स की प्रक्रियाएं आयीं हैं, जिन्होंने इस एनकाउंटर को फिल्मी स्टाइल एनकाउंटर बताया है.
अंत में मैं तो यही कहना चाहूंगा कि क़ानून से ऊपर कोई नहीं है . अगर विकास दुबे ने मौका देखकर भागने की कोशिश की और हमारे पुलिस के जवानों को एक बार पुनः मौत का शिकार बनाने की कोशिश की तो उसका जो हश्र हुआ वो बिल्कुल ठीक है . वाकी अगर कोई जांच होती है तो खुद समाज को सच देखने को मिलेगा.

 


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