Truth Manthan

पौधे का डर

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सावन की फुलझड़ी उठी और बादल भी मंडराया
पौधों की पंखुड़ियों से प्यार नजर तब आया

एक फूल मुझसे बोला क्या ऐसा ही है भारत
मैंने उससे कहा नहीं यह सावन का है मौसम
आता जाता हर मौसम यहां सब को खुश करता है
बच्चों से किसान को लेकर सब को खुश करता है

एक शाम एक बीज अंकुरित होकर मुझसे बोला
क्या यह मौसम हर पल रहता मुझको लगता प्यारा
मैंने बोला यह सावन है लेकिन मत घबराना
ग्रोथ तुम्हारी होती रहेगी यहां के हर मौसम में
सावन तो सबसे सुहाना है लेकिन हर मौसम को आना है

एक दिन सुबह जब मैं उठा तो सामने देखा कि एक पौधा खड़ा
पौधे ने पूछा कितना सुहाना मौसम है मैंने कहा कि यह तो सावन है
पौधा उदास हो गया लेकिन फिर से होश में आ गया
मैंने कहा यहां का हर मौसम निराला होता है
तुम्हारे लिए हर मौसम बहुत ही सुहाना होता है
कभी घटाएं छाती हैं तो कभी होती है घनघोर धूप
लेकिन तुम बिल्कुल मत डरना तुममे है वह शक्ति

एक दिन जब मैं सुबह उजाला पेड़ दिया दिखलाई
मैंने कहा वही अंकुर हो जो संशय करते थे
आज देख लो हर मौसम ने तुमको इतना बड़ा बनाया
घबराना था वहम तुम्हारा डरने की थी आदत
लेकिन जिसने ठान लिया वह इतना ऊंचा उठ गया
मौसम तो सब आते जाएं तुमको क्या है डरना
पीछे मत मुड़ कर के देखो आगे बढ़ते रहना

एक दिन ऐसा आएगा जो दरख़्त तुम बन जाओगे
तुम्हें काटने से पहले भी लोग बहुत घबराएंगे
इसीलिए हिम्मत से आगे ही तुम बढ़ते रहना
दुनिया को खुशियां देना और जीवन में हंसते रहना
यह सुनकर के पेड़ हंसा और बोला मुझसे बानी
मुझे लग रही प्यास जरा सा पिला दो मुझको पानी

अवनीश पांडे, बिहार 

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