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लखनऊ
Hindi Stories
Kumar Gautam

लखनऊ: Residency – A True Ghost Tale That Stands up (Hindi)

लखनऊ की रेज़ीडेंसी में, सन् 1857 ईसवी में, अंग्रेज़ों और भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानियों में भयानक युद्ध हुआ था। दोनों पक्षों के, सैकड़ों लोग इस जंग में जान से हाथ धो बैठे थे। आज, उसी भयावह घटना से सम्बन्धित भूतकथा भेज रहा हूं। अभी शाम का झुटपुटा है। जैसे-जैसे

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रामराज्य
Manthan
Kumar Gautam

रामराज्य : BJP’s Ram Rajya Conspiracy to Snatch Away the Rights of Shudras and Women

रामराज्य: हमारे देश में जब से भाजपा की सरकार बनी है। तब से राम राज्य लाने की बात की जा रही है। राम राज्य के चक्कर में देश के ऐसे हालात हो गए हैं कि पढ़े लिखे लोग भी फुटपाथ पर भीख मांगते दिखाई दे रहे हैं। हमारे सरकारी संस्थाएं

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यादव
Manthan
Kumar Gautam

यादव: SC/ST Act के दुरुपयोग का गलत भ्रम फैलाते समाज के कुछ अनपढ़ ठेकेदार

यादव : अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 को 11 सितम्बर 1989 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया था, जिसे 30 जनवरी 1990 से सारे भारत में लागू किया गया। यह अधिनियम उस प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता हैं जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य

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मेरी प्यारी मेरी दुलारी नन्ही सी कली
Poem
Kumar Gautam

मेरी प्यारी मेरी दुलारी नन्ही सी कली

मेरी प्यारी मेरी दुलारी नन्ही सी कलीरोज देर तक मुझे जगाती नन्ही सी कली हंसती है तो खनखन जैसी आवाजें आती हैंपढ़ती है तो ऐसा लगता मां सरस्वती आती हैंकरके शैतानी वह मुझको रोज हंसाती हैलोटपोट हो जाता जब वह कुछ बन के आती है नन्हा बैग लाद पीठ पर

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मुझे अच्छा नही लगता, हास्य कविता
Poem
Kumar Gautam

मुझे अच्छा नही लगता, हास्य कविता

  मैं रोज़ खाना पकाती हू, तुम्हे बहुत पयार से खिलाती हूं, पर तुम्हारे जूठे बर्तन उठाना मुझे अच्छा नही लगता। कई वर्षो से हम तुम साथ रहते है, लाज़िम है कि कुछ मतभेद तो होगे, पर तुम्हारा बच्चों के सामने चिल्लाना मुझे अच्छा नही लगता। हम दोनों को ही

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मानस में बैठी माँ...
Poem
Kumar Gautam

मानस में बैठी माँ…

आँखों में है उसे संजोये सारा गांव गिराव।देवलोक दिखता था जब भी छूता माँ के पांव।। बिना कहे ही मेरे मन का दर्द समझती थीअनपढ़ होकर भी कविता का अर्थ समझती थीशगुन मनाती थी पाहुन का सुन कागा के कांवफूलों की पंखुड़ी जैसे थी उसकी अद्भुत डांटशब्द-शब्द लगते थे जैसे

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