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Krishna and Daughter दो कवितायें

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Krishna को हमारे देश में भगवान माना जाता है. भगवान krishna की सारे हिन्दुस्तान में पूजा होती है. हिन्दू धर्म में krishna को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है.आज इस लेख में मैं हमारे पाठकों की दो कविताओं krishna और “रूठी है बिटिया हमारी” नाम की दो कवितायें आपको प्रस्तुत कर रहा जो आपको बहुत ज्यादा पसंद आयेंगी .

कान्हा कब तुम आओगे

कान्हा कब तुम आओगे

जब अत्याचार धरा पर बढ़ जाएगा

पाप का घड़ा छलक जाएगा

धर्मसंस्थापनाय सम्भवामि युगे-युगे तो

हे कान्हा, तुम कब आओगे?

हो रहा मानवता का संहार

सुनकर हम निर्बलों की पुकार

धरती पर लेकर अवतार

हे गिरधर, तुम कब आओगे?

निज स्वार्थ में है डूबा हुआ प्राणी

न हया बची न आँखों में पानी

जग को फिर से कर्मयोग बताने

हे चक्रधारी, तुम कब आओगे?

फँसी है दुनिया मृगतृष्णा के नाल में

रंग-रूप औ वासना के जाल में

हम सबको फिर से पावन प्रेम सिखाने

हे मनमोहन, तुम कब आओगे?

अमन-शांति कहाँ रही किसी देश में

दंगे की आग सुलग रही हर प्रदेश में

मुरली की तान पर सबको जगाने

हे मुरलीधर, तुम कब आओगे?

अज्ञान के कारण, विज्ञान के कारण,

खुद को ही माने कई ढोंगी भगवन

अपना ही अस्तित्व बताने

हे गोपाल, तुम कब आओगे?

अमृता मिश्रा, भिलाई, छत्तीसगढ़

रूठी है बिटिया हमारी

रूठी है बिटिया हमारी ,आओ मनुहार करें।

ऐसे तो करते ही हैं , थोड़ा ज्यादा सा प्यार करे।

रूठी है बिटिया हमारी,

आओ चलो तुम्हें मिठाई खिलाएं,

या की नए कपड़े दिलाएं,

कह तो तुझे परियों सी सजा दें ,

नहीं तो पार्क की सैर करा दें,

रूठी हंसी की डिबिया हमारी, आओ मनुहार करें।

रूठे ना बिटिया हमारी आओ मनुहार करें।

ऐसे तो करते ही हैं , थोड़ा ज्यादा सा प्यार करे।

दूसरी

रूठ कर नाराज़ हो भी गए तो क्या?

कौन है जो मनाएगा।

आंसू गर छलक गए भी तो क्या?

पोछने कौन आएगा।

जब तलक थे फसाने प्यार के,

रूठ कर दिल जलाते रहे,

आग इतनी बढ़ी की बुझी ही नहीं,

अब लगे कि रूठी है ये जिंदगी।

गलतियाँ की किसने अब समझे भी तो क्या?

माफियां कौन लुटायेगा।

प्यार था गर तो ये दूरी हुई क्यों?

कौन है जो समझ ये पायेगा।

अंकिता गुप्ता, रांची, झारखंड 

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