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Kisan- जून की धूप कहानी
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जून का महीना था चिलचिलाती धूप में हरिया अपने मन में बड़बड़ाता हुआ जा रहा था। धूप इतनी तेज थी की जमीन भी आग सी तप रही थी। हरिया के पैर में चप्पल भी नहीं थी। वह नंगे पैर लंबे-लंबे पगों से आगे बढ़ता जा रहा था। उसको अपनी नहीं बल्कि अपने खेतों की बहुत ज्यादा फिक्र थी। गायों के झुंड खेतों में आते थे और कुछ ही मिनटों में खेत का खेत साफ कर जाते थे। हरिया के एक खेत में इस साल बहुत अच्छी खरबूजे की फसल थी। जिसे देखकर उसकी जान में जान आती थी। उसके पास पैसा नहीं था लेकिन उसने गांव के ही जमीदार भीखम उधार पैसा लिया था। जिस पर जमीदार का ब्याज भी बहुत तेजी से बढ़ रहा था।

हरिया मन ही मन में सोच रहा था। इस बार खरबूजे बेचकर भीखम का कर्ज चुकाऊंगा और इसके बाद बीवी के लिए एक अच्छी साड़ी और अपने लिए एक कुर्ता खरीद लूंगा। बच्चों के पास भी कपड़े नहीं है उन्हें भी कुछ ना कुछ खरीदना पड़ेगा। आगे सर्दी भी आने वाली है जिसके लिए रजाई और कंबल भी लेना पड़ेगा। वह यही सब अपने मन में बड़बड़ाते हुए खेतों की तरफ जा रहा था। उसे अपने पैरों की फिक्र नहीं थी। आम आदमी तो ऐसी गर्मी में चार कदम भी नहीं चल पाता लेकिन हरिया अपने मन में सपने बुनता हुआ खेतों की तरफ बढ़ता चला जा रहा था।

खेत के पास पहुंचते ही हरिया गदगद हो गया खेत में बहुत अच्छी खरबूजे की फसल थी। वह हर समय खेत में ही रहता था क्योंकि अगर धोखे से भी गाय आ गई तो उसका पूरा का पूरा खेत कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाएगा और उसके सपने मिट्टी में मिल जाएंगे। इसलिए हरिया दिन में और रात में दोनों समय खेत पर ही गुजरता था।
हरिया की पत्नी भी फूली नहीं समा रही थी क्योंकि दसों साल बाद इतनी अच्छी फसल उसके खेतों में हुई थी लेकिन कर्ज भी बहुत ज्यादा था। भीखम अक्सर आकर हरिया को धमकी भी देता रहता था फसल काट लो और पाई पाई चुका दो नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा, भीखम ने हरिया से कहा। हरिया ने हाथ जोड़ कर कहा इस साल खेत में फसल अच्छी है। मैं आपका एक-एक पैसा चुका दूंगा।

खरबूजे की फसल लगभग तैयार थी। जितनी खुशी आज हरिया को हो रही थी उसको अंदाजा लगाना मुश्किल था। वह मन ही मन में खुशी से झूम रहा था। वह पूरा दिन धूप हो या छांव खेतों पर ही बिताता रहता क्योंकि उसको पता था कि अगर जरा सी भी चूक हुई तो मेरा सब कुछ नष्ट हो जाएगा रात में भी वह जरा सी हलचल सुनते ही उठ के बैठ जाता अपने खेतों को इधर उधर देखता और आकर फिर सो जाता उसकी नींद कभी पूरी नहीं हो पाती थी। उसे सपने में भी खेतों की याद बनी रहती थी।

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तीन दिन बाद खरबूजे की तुड़ाई का काम शुरू होने वाला था। हरिया और उसकी पत्नी कमला खुशी के मारे फूले नहीं समा रहे थे। उन्हें पता था कि अब हमारा भी अच्छा समय शुरू होने वाला है। हम भी अब अच्छे कपड़े पहनेंगे। हमारे भी रजाई और गुदगुदे गद्दे होंगे ताकि सर्दी में पूरी रात ठिठुर ठिठुर कर ना गुजारने पड़े। हजारों सपने मन में हरिया और उसकी पत्नी ने संजोए हुए थे क्योंकि उसके खरबूजे इतने अच्छे थे जिन्हें देखकर पड़ोसियों को भी जलन होती थी।

हरिया ने अपना पूरा खून पसीना लगाकर खरबूजे की फसल तैयार की थी। 4 बीघे की फसल गांव में किसी ने पहली बार की थी और इतनी अच्छी फसल शायद आस-पास के गांव में कई साल बाद हरिया ने की थी। खेत में खरबूजे ही चमक रहे थे। इस साल खरबूजे का भाव भी बहुत अच्छा था। इसलिए हरिया सोच रहा था की उसका सारा कर्ज भी चुकता हो जाएगा और ढेर सारे रुपए भी बच जाएंगे।

अगले दिन हरिया सुबह उठा तो अपनी फसल को देखकर बहुत ही खुश हुआ हालांकि रात वह सो नहीं पाया था। रात भर जानवरों को भगाता रहा मगर सुबह जब उसने अपनी फसल को देखा तो एकदम से उसकी पूरी नींद ही गायब हो गई खुशी से एकदम चेहरा लाल हो गया। उसकी पत्नी आई उसने खाना हरिया को खाना खिलाया। इसके बाद हरिया आराम करने लगा। हरिया की पत्नी खाना देखकर चली गई।

हरिया छोटा सा एक लकड़ी का झोपड़ा बना का रहता था। उसी के नीचे आराम करने लगा। दोपहर का 12 बज चुका था। हरिया भी उठ-उठ कर इधर उधर देख रहा था क्योंकि दोपहर में ही गायों का खतरा ज्यादा बना रहता था। चारों तरफ धूप के कारण सन-सन की आवाज आ रही थी। चारों तरफ सन्नाटा छाया था हरिया के खेत से गांव की दूरी लगभग 1 किलोमीटर थी। हरिया ने इधर उधर देखा कोई जानवर कोई गाय दूर -दूर तक दिखाई नहीं दे रही थी।

यह सोच कर वह आराम करने लगा। इतने में ही उसे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला। हरिया को नींद आते गायों का एक बड़ा सा झुंड आया और उसके खेत में टूट पड़ा। हरिया इतना थका हुआ था कि वह गहरी नींद में सो गया। उसे कुछ पता ही नहीं चला और गायों ने उसके खेत को कुछ ही मिनटों में पूरी तरह से साफ कर दिया। सारे खरबूजे और पौधे पूरी तरह से चट कर दिए थे। हरिया नींद में सपने देख रहा था। गायों ने पूरा खेत का खेत साफ कर दिया था। दोपहर 3 बजे के आसपास हरिया की पत्नी जब खेत में आई तो खेत में उस समय सिर्फ दो गाय चर रहीं थीं। बाकी खेत पूरी तरह से साफ हो गया था। उसमें एक भी खरबूजा नहीं बचा था।

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हरिया की पत्नी दौड़ती हुई गई। हरिया अभी भी गहरी नींद में सोया था। उसने हरिया को जगाया और जब हरिया ने खेत की तरफ देखा तो उसके होश उड़ गए। वह वहीं पर अपना माथा पटकने लगा। उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए थे। अब वह सोच रहा था, जमीदार भीखम का कर्ज कैसे चुकाऊंगा। हरिया की पत्नी भी बेहोश होकर वही चिलचिलाती धूप में गिर गई। हरिया को भी होश नहीं था। वह बहुत बड़ा आदमी बनने का सपना नहीं देख रहा था वह सिर्फ अपना कर्ज उतारने का सोच रहा था और कुछ कपड़े खरीदने के बारे में सोच रहा था लेकिन उसके आज सपने पूरी तरह से टूट गए थे। हरिया और उसकी पत्नी की आंखें खेत को देखकर पथरा सी गई थी। खेत में चर रहीं दो गायें भी अब जा यहीं थीं। शायद उनका पेट भर गया था। खेत में ऐसा कुछ भी नहीं बचा था जिसे कोई जानवर भी खा सकें। हरिया ने आसमान की तरह देखा और फिर वहीं गिरकर बेहोश हो गया।

आर. के. गौतम, उत्तर प्रदेश 

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