Truth Manthan

हुस्न और इश्क की शराफत करता रहा, मैं तुझे भूल से सदा प्यार करता रहा

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हुस्न और इश्क की शराफत करता रहा,
मैं तुझे भूल से सदा प्यार करता रहा ।
मगर तू ना हो सकी मेरी इस दुनिया में,
मैं तो अपने प्यार की सदा पूजा करता रहा।

आंखों में आंसू लेकर तेरे दर पर आया,
तब भी तुझ को मुझ पर ना रहम आया ।
अब जा रहा जनाजा मेरे प्यार का,
तब आज तुझे मेरा प्यार याद आया ।

प्यार में जीना सीखा नहीं था,
किसी को अपना बनाना सीखा नहीं था,
जब से कदम दिया तूने मेरी जिंदगी में,
ए-बेवफ़ा इससे पहले मैंने शराब पीना सीखा नहीं था ।

तू जो तड़पाती है तो मेरी जान जाती है,
जब तू दूर जाती है तो तेरी याद आती है।
जब से किया तूने मुझे बर्बाद,
अब हर घड़ी मुझे अपने प्यार पर शर्म आती है ।

तुझसे मिलने की दुआ करता था,
हर पल निगाहों में रखा करता था।
क्या पता था तेरी इन जफाओं का,
मैं तो तेरे प्यार की खातिर जिया करता था।

तेरे जनाजे पर मुझे बड़ा जोश होगा,
तू चली जाएगी इस दुनिया से जालिम।
मगर ख्याल कर ए-बेवफा,
मेरा इस भरी दुनिया में तेरे शिवा कौन होगा।

तुम सा गर दूसरा हुआ तो रब से शिकायत होगी,
किसी का रुख गर तेरी तरफ हुआ तो कयामत से पहले कयामत होगी,


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