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Hamari Adhuri Kahani – तीन कहानियां

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Hamari Adhuri Kahani जिंदगी का सबसे दर्द है। जिसका आभास सिर्फ उन्ही को होता है जो इस स्थिति से गुजरते हैं। प्रेम के साथ-साथ इसमें आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कुछ लोग तो प्यार से नफ़रत ही करने लगते हैं। आज मैं आपके लिए तीन ऐसी ही Hamari Adhuri Kahani लेकर aayaa हूँ जो शायद आपको कुछ एहसास कराने में कामयाब रहेंगी। आइये पढ़ते हैं उन तीन Hamari Adhuri Kahani कहानियों को-

Hamari Adhuri Kahani-1

क्या मेरी मोहब्बत अधूरी है

मेरे और उनके कहने सुनने का मिलन ना हो पाया

ना मैं दर्द की खामोशियां बता पाया ना वो अल्फाज समझ पाई

उनके निगाहें बार-बार बरसता रहा

मै प्यार का इजहार करता रहा

ना मैं खुद को पढ़ पाया ना वह मुझे लिख पाई

गलती ना मेरी थी ना रब की

जब प्यार ही बसा था सपनों में, मैं उनमें ही रहा

हसीं और न्यारा प्यास लगी , उस देवी कि कुछ ऐसे मजबूरी

सपने की कहानी संघर्ष रह गई, हमारी मोहब्बत की कहानी भी अधूरी रह गई।

सुनीता वर्णवाल, झुमरी तलैया 

Hamari Adhuri Kahani-2

मेरी कहानी भी अधूरी रह गई…

उस कमबख़्त ने मुहब्बत के ख्वाब दिखाकर

समंदर जितना गम दे दिया…

सपनों का शहजादा आया था उसने हल्के से मेरा दिल चुराया था

और धीमे से अपनी मोहब्बत का इजहार किया था…

उसकी झूठी सी बातें शहजादी को मोहब्बत से भी ज्यादा हसीन लगती थी…

शहजादी को यकीन था पहले से ही

ये मुहब्बत या तो झूठ हैं

या फिर ये गम जमाने भर का देकर जाएगी…

कैसे हो यकीन

भला असली में शहजादा होता हैं….ये मूर्ख सी मुहब्बत थी

जिसमें पागलपन था मासूम सा…

अब यकीन ने हकीकत़ से रुबरु करवाया

मुहब्बत ने इश्क़ में तड़पना सिखाया …

मेरी इकतरफा मोहब्बत अधूरी सी रह गई…

कभी कुछ लिखते हैं कभी कुछ…क्योंकि शब्द तो पूरे हैं

लेकिन थोड़े खवाब अधूरे है

तो कुछ कहानीयां अधूरी है


Hamari Adhuri Kahani-3

वो उस रोज तुम्हारा मुझे मैसेज करना और मेरा तुम्हे जवाब देना.…..और फिर चल पड़ा यूं ही हमारी बातों का सिलसिला।।।

वो रोज- रोज तुम्हारा बातें करना और मेरा तुम्हे सुनते रहना…..और सुनते- सुनते तुम्हारी बातों में खो जाना।।।

वो रोज – रोज तुम्हारा हंसी – ठिठोली करते रहना…..और मेरा मुस्कुराते हुए तुम्हारी हंसी में खो जाना।।।

वो रोज – रोज तुम्हारा मुझे परेशान करना……और मेरा परेशान हो जाना।।।

वो रोज – रोज मेरा तुम्हारी आंखों में देखते रहना….और तुम्हारा मेरी आंखों में खो जाना….और फिर मेरा शर्माकर पलकें झुका लेना।।।

वो किसी रोज मेरा गुमसुम सा रहना….और आंखों में देखकर मेरे मन की सारी बातें जान लेना।।।

वो किसी रोज मेरा खुशी से चहकते रहना….और बिना वजह जाने ही तुम्हारा खुश हो जाना।।।

वो कब मेरा – तुम्हारा से हर चीज हमारी हो जाना…… मेरी हर परेशानी का हल होता था न तुम्हारे पास ।।।

कितना जानने लगे थे न हम एक – दूसरे को..… फिर क्यों रह गई हमारी “अधूरी कहानी”………

रागिनी सिंह, रीवा, मध्य प्रदेश

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