Truth Manthan

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आरती की नई-नई शादी हुई थी। उसे उसका जीवनसाथी बहुत थी प्यार करने वाला मिला था। वह दोनों आपस में बहुत ही घुले मिले रहते थे। आरती ने जैसे पति की कल्पना की थी उसे मनोज वैसा ही पति मिला था। आरती और मनोज एक ऐसी जिंदगी जी रहे थे जिसमें सिर्फ खुशियां थीं। दुख इत्यादि चीजों का नामोनिशान नहीं था। दोनों मस्ती से जिंदगी काट रहे थे।

आरती जहां बहुत ही खूबसूरत थी वही मनोज अंदर और ऊपर दोनों तरफ से भी खूबसूरत था। मनोज अपनी पत्नी आरती पर अपनी जान छिड़कता था तो उसकी पत्नी आरती भी उसे अपना सब कुछ मान चुकी थी। दोनों की जिंदगी में मोड़ उस समय आया जब करवा चौथ का व्रत आया। आरती ने पहले से ही अपनी बहुत सी तैयारियां कर रखी थी। वह अपने पति की लंबी उम्र की कामना करना चाहती थी लेकिन उसके पति ने उसे व्रत रहने से मना कर दिया। इतना सुनकर आरती बहुत ही दुखी हुई।

उसने अपने पति से पूछा आप मुझे व्रत क्यों नहीं रहने देना चाहते हैं। मनोज ने कहा तुम मेरी अर्धांगिनी हो। दुनिया की हर चीज पर तुम्हारा भी उतना ही अधिकार है जितना कि हमारा। हर साल महिलाएं करवा चौथ का व्रत क्यों रहती हैं। पुरुषों के लिए करवा चौथ का व्रत क्यों नहीं बनाया गया। क्या महिलाएं अपने पति के लिए लंबी उम्र की कामना कर सकती हैं तो पुरुषों को अपनी पत्नी के लिए लंबी उम्र के लिए कामना क्यों नहीं करनी चाहिए। ऐसा इस त्यौहार को क्यों नहीं बनाया गया। मनोज ने कहा यह सिर्फ एक तरह का पाखंड है जिसमें महिलाओं को पुरुषों से नीच और कमजोर दिखाया गया है।

हमारे धर्म शास्त्रों में भी कई जगह इन बातों का उल्लेख किया गया है। जैसे –“ढोल, गंवार , शूद्र ,पशु ,नारी सकल ताड़ना के अधिकारी” जिसमें महिलाओं को बहुत ही नीच बताया गया है। मैं तुम्हें उन पाखंडों में नहीं पड़ने देना चाहता हूं। मैं जितना प्यार तुम्हें करता हूं तुम बदले में उससे कहीं ज्यादा मुझे प्यार करती हो तो दोनों को अधिकार भी बराबर का मिलना चाहिए। अगर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की दुआएं मांग सकतीं हैं तो पुरुषों को भी अपनी पत्नियों के लिए व्रत रहना चाहिए और उनकी लंबी उम्र की दुआ मांगना चाहिए।

आरती अंदर से बहुत डरी हुई थी वह अपने पति को खोना नहीं चाहती थी लेकिन उसके विवेक ने काम करना बंद कर दिया था। वह सोच सोचकर अंदर अंदर ही बहुत डरी हुई थी। मनोज ने पीएचडी कर रखी थी और वह साइंटिस्ट था। वहीं दूसरी तरफ आरती भी एक डॉक्टर थी। इसके बावजूद भी उसका अंतर्मन गवाही नहीं दे रहा था। वह करवा चौथ का व्रत छोड़ना नहीं चाहती थी। उसे अंदर ही अंदर ऐसा लग रहा था की अगर मैं अपने पति के लिए करवा चौथ व्रत नहीं रहीं तो ऐसा ना हो कि कोई अनहोनी हो जाए और मुझे मनोज को खोना पड़े। वह बहुत डरी हुई थी।

उसने मनोज से व्रत रहने के लिए कई बार कहा लेकिन मनोज ने हर बार उसे मना कर दिया। अगले दिन करवा चौथ का व्रत था। उससे पहले ही दोनों पति पत्नी में काफी बहस हुई। मनोज ने कहा कल हमारे बच्चे होंगे तो तुम्ही चाँद को बच्चों का मामा बताओगी। जब चांद बच्चों का मामा हुआ तो तुम्हारा क्या होगा ? तुम्हारा भाई हुआ ना। क्या तुम अपने भाई को पति मानकर उसकी पूजा करोगी। यह कदापि गलत है। हम लोग जब तक अनपढ़ और गवार थे। तब तक तो यह सही था लेकिन अब हम लोगों को इस बात को सोचना चाहिए।

चांद ना तो कोई मामा है और न हि किसी का पति। चांद के बारे में आज के समय में हर कोई जानता है कि चांद पृथ्वी की तरह एक ग्रह है। इतना ही नहीं अब तो मानव भी चाँद तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद भी हम अपनी आंखों में पट्टियां बांधकर उसे कैसे मामा और तुम उसे अपने पति मान सकती हो। वह एक पृथ्वी की तरह जमीन का टुकड़ा जिसको कुछ समाज के ठेकेदारों ने देवता पति मामा इत्यादि बता दिया। लेकिन अब हम लोगों को पढ़ने लिखने के बाद भी इस बात का सही अर्थ नहीं पता चलता है तो इससे बड़ी दुनिया में कोई मूर्खता नहीं होगी।

तुम करवा चौथ का व्रत छोड़ दो। आरती भी अब तक बहुत कुछ समझ चुकी थी। उसने करवा चौथ का व्रत नहीं रखा। इसके बावजूद भी उसका पति मनोज पूरी तरह से स्वस्थ और ठीक था। अगला करवा चौथ आया इसके बाद 5 करवा चौथ निकल गया लेकिन आरती ने किसी भी करवा चौथ व्रत नहीं रखा। उसका एक बेटा भी हो चुका था। पति और पत्नी बहुत ही खुश थे।

पड़ोस में रहने वाले उसके एक पड़ोसी की पत्नी करवा चौथ व्रत पर काफी ढकोसला करते थे लेकिन 5 साल के अंदर ही उसके जवान पति की मौत हो गई। अब आरती के अंतर्मन का सारा डर निकल चुका था। उसने करवा चौथ ही नहीं बहुत से त्योहारों को अलविदा कह दिया था। अब जब भी उसकी इच्छा होती वह उसका पति और उसका बच्चा कोई भी त्यौहार किसी भी दिन मना लेते थे। त्योहारों का मतलब सिर्फ इतना है कि लोगों में खुशियां बांटना लेकिन जो हिंदू धर्म के थोपे गए त्योहारों में फंसता जाता है। उसके अंदर का डर और भी बढ़ता जाता है। वह लाख कोशिश करने के बाद भी इनसे दूर नहीं हो पाता है क्योंकि उसका अंतर्मन उसे इसकी इजाजत नहीं देता है।

जबकि आरती ने इन सब चीज को साबित कर दिया था। इन सब चीजों से कुछ नहीं होता है। आपस में प्यार और लोगों की भलाई करने से दुनिया का सबसे बड़ा सुख मिलता है। इन जबरदस्ती थोपे गए त्योहारों से सिर्फ उनको खुशियां मिलती है जिन्होंने इन त्योहारों को बनाया है। त्योहारों का असली सुख सिर्फ तब मिलता है जब हम और हमारे आसपास के सभी लोग खुश रहें।

आज भी हमारे भारत देश में 30% आबादी भुखमरी की कगार पर है। वह इन त्योहारों के बारे में नहीं जानते हैं क्योंकि उनके पास पैसा ही नहीं है। उनके बच्चे दूर से देखकर रोते रहते हैं। हमें चाहिए की खुद तो खुश रहें लेकिन हमारे आस पास के लोगों को भी खुश रखें बस इन्हीं में दुनिया के सभी त्योहारों का आनंद है।

आरती पूरी तरह से लीडर हो चुकी थी। उसका अंतर्मन जाग उठा था। उसने पास में ही रहने वाली एक छोटी सी बच्ची को पढ़ाना शुरू कर दिया। उसको अपने बेटे और उस बच्ची में ही दुनिया के सभी त्योहार नजर आते थे। जब वह दोनों मिलकर खिल खिलाते हैं तो आरती और मनोज को सबसे बड़ी खुशी मिलती है। मनोज एकदम हट्टा कट्टा है लेकिन करवा चौथ का व्रत रहने वाले कई महिलाओं के पति आरती के सामने ही मौत के मुंह में चले गए। उनकी पत्नियां उनके लंबे जीवन की दुआ तो मांगती रहीं लेकिन उनके जीवन का एक पल भी नहीं बढ़ा सकीं।

मनोज ने कहा हमें अंधविश्वासों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करना चाहिए। हम सब पढ़े लिखे हैं विज्ञान का युग है। हमें विज्ञान पर भरोसा करना चाहिए। विज्ञान ही हमारा हर मुसीबत में सहारा देती है। इतने में ही उसके दोनों बच्चे आ गए और अपने पापा की बात पर जोर-जोर से खिल खिलाने लगे और दौड़ कर अपनी मम्मी और पापा से लिपट गए। बच्चों को भी दुनिया का सबसे बड़ा सुख मिल रहा था और आरती और मनोज दुनिया की सबसे बड़ी खुशी पा चुके थे।

Amit Singh

103B Diwan Mohalla,

Patna, Bihar

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69 thoughts on “Conscience – fear thousands of years old (अंतर्मन – डर हजारों साल पुराना)”

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