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सिविल सर्विसेज में निश्चित सफलता के लिए खास टिप्स

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हर मां बाप की इच्छा होती है उसका बेटा डीएम, कलेक्टर या फिर एसपी बने लेकिन किसी भी मां बाप को यह कहते भी नहीं सुना होगा कि उसका बेटा चपरासी बने। इसका मुख्य कारण मां बाप की सोच काफी बड़ी होती है। लेकिन जो यह काम करने जा रहा है उसकी सोच कितनी बड़ी है कुछ भी बनना उसी पर डिपेंड करता है। आज मैं इस लेख के माध्यम से सिविल सर्विसेज के बारे में कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहा हूं जिनके माध्यम से आपको सफलता जरूर मिलेगी। यह सभी जानते हैं कि सफल होने के लिए व्यक्ति के अंदर मजबूत आत्मविश्वास की जरूरत होनी चाहिए। जिनके इरादे मजबूत होते हैं। उनको दुनिया की कोई भी ताकत रोक नहीं पाती है।

सिविल सर्विसेज के ऐसे उदाहरण भी आपको मिल जाएंगे जिनकी शादियां हो गई और उनके बच्चे भी हो गए लेकिन उसके बाद भी उन्होंने सिविल सर्विसेज में अपना नाम लाकर उन लोगों का मुंह बंद कर दिया जो लोग अक्सर दुहाई देते रहते हैं कि शादी के बाद तो बहुत जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और पढ़ाई लिखाई नहीं हो पाती है। ऐसा बिल्कुल नहीं है सिर्फ व्यक्ति के इरादों मैं दम होनी चाहिए। अगर लक्ष्य सटीक और सीधा है और लक्ष्य के हिसाब से व्यक्ति मेहनत कर रहा है तो दुनिया की ऐसी कोई भी ताकत नहीं है जो उसे उसके लक्ष्य से भटका सके।

किसी ने सही कहा है, कि अगर तुमने खुद मान ही लिया तो हार होगी और अगर ठान लिया तो पक्का जीत होगी। सिविल सर्विसेज भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। इसके लिए एक प्लान बना कर तैयारी करनी पड़ती है और कुछ प्लान के तहत नियमित रहना पड़ता है जो लोग नियमित रहकर अपने लक्ष्य पर निशाना बनाते हैं वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। जो अपने ही बनाए नियमों से भटक जाते हैं वह अपने लक्ष्य से भी भटक जाते हैं। किसी भी काम को करने के लिए हारना या असफल होना उतना ही जरूरी होता है जितना कि जीतना या सफल होना।

असफल होने से कभी भी टूटना नहीं चाहिए और जो लोग टूट जाते हैं उन्हें सफलता का जीवन में कभी स्वाद चखने को नहीं मिल पाता। हार और जीत का एक संयोग होता है अगर हार है तो जीत भी होगी। व्यक्ति को हारने या असफल होने के बाद टूटने के बजाय उन चीजों पर ध्यान देना चाहिए जिनकी वजह से वह असफल हुआ है। साथ ही और उन चीजों पर ज्यादा मेहनत करनी चाहिए जहां से असफलता मिली। अक्सर देखने को यही मिलता है कि जब व्यक्ति सफलता से मात्र एक कदम दूर रह जाता है वह वहीं से वापस लौट आता है और हार मान लेता है।

इससे जुड़ी हम आपको एक छोटी सी कहानी सुनाने जा रहे हैं। रमेश और अंकित ने साथ-साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की थी। दोनों ही बहुत ही मेहनती थे। दिन रात मेहनत करते 14-14 घंटे पढ़ते क्योंकि उनका लक्ष्य सफल होना था। इतनी मेहनत करने के बाद भी दोनों असफल हो गए लेकिन टूटे नहीं। इसके बाद फिर दोनों ने अपनी गलतियों को जांचा और पुनः अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ने लगे एक बार फिर दोनों ने खूब मेहनत की दिन रात पढ़ाई करते रहे। इस बार उन्होंने 14 घंटे की वजह है 16 घंटे पढ़ना शुरू कर दिया लेकिन इस बार भी दोनों असफल हो गए।

अंकित इस असफलता से टूट गया वह सोचने लगे अब सिविल सर्विसेज को पास करना मेरे बस की बात नहीं ? शायद अब मैं कभी भी इस परीक्षा को पास नहीं कर पाऊंगा? यह बहुत कठिन है ? इतनी मेहनत करने के बाद भी मैं सफल नहीं हो सका अब मुझे इसमें अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। दूसरी तरफ रमेश का कुछ और ही सोचना था। वह सोच रहा था कि शायद मैं अब बिल्कुल करीब हूं। मुझे अपनी कुछ और कमियों को सुधारना होगा। इसके बाद सिविल सर्विसेज की परीक्षा में सफलता मिल जाएगी।

उसने अपनी कमियों को ढूंढा उन्हें सुधारा और एक बार पुनः कड़ी मेहनत की और उसको वह चीज मिली जिसकी वह तलाश में था। उसका लक्ष सटीक था। वह असफलताओं से डरा नहीं था। वह उसके द्वारा होने वाली कमियों को सुधारा और उसने सिविल सर्विसेज की परीक्षा बहुत ही अच्छे अंकों के साथ पास की। रमेश और अंकित में फर्क सिर्फ इतना था कि रमेश को खुद पर विश्वास था कि मैं जो काम करने जा रहा हूं उसे करके ही दम लूंगा। वहीं दूसरी तरफ अंकित ने सोचा तो वहीं था मगर रास्ते में भटक गया उसकी सोच बदल गई और जैसे ही उसकी सोच बदली उसका लक्ष्य भटक गया।

सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए मैंने कई उन लोगों से बात की जिन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की। मैंने जो निष्कर्ष निकाला उससे यह साबित हुआ की सिविल सर्विसेज की परीक्षा के लिए यह इतना जरूरी नहीं है कि आप कितने घंटे पढ़ते हैं। इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि आप कैसे पढ़ाई करते हैं। सदैव लक्ष्य बनाकर एकाग्र होकर जो लोग पढ़ाई करते हैं उन्हें सफलता निश्चित मिलती है। जो लोग जबरदस्ती बैल की तरह समझते हैं कि मुझे तो बोझा ढोना है उन लोगों को सफलता मिलना बहुत कठिन हो जाता है।

सिविल सर्विसेज की परीक्षा के लिए निरंतरता बहुत ही आवश्यक है इसके लिए यह जरूरी नहीं कि आप 18 घंटे पढ़ाई करें और 3 दिन बैठकर आराम करें बल्कि जरूरी यह है कि आप 4 से 8 घंटे पड़े हैं लेकिन नियमित रूप से पढ़ें। पूरा ध्यान लगाकर अपने लक्ष्य को निशाना बनाकर पढ़ाई करें। इससे सफलता जरूर मिलेगी। ज्यादातर लोगों का यही मानना भी है की सिविल सर्विसेज की परीक्षा के लिए निरंतरता बहुत ही आवश्यक है। ऐसा नहीं एक दिन आपने 20 घंटे पढ़ाई कर ली उसके एवज में अब 3 दिन तक सो रहे हैं ,ऐसा करने से सफल होना असंभव सा हो जाता है और जो लोग सिर्फ 4 घंटे पढ़ते हैं और निरंतर रूप से पढ़ते हैं वह सफल होते हैं। उन लोगों का लक्ष्य सटीक होता है।

आर. बी . सिन्हा, पूर्व प्रवक्ता, नई दिल्ली 

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