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Poem

माँ का अनोखा रिश्ता-Mother's Unique Relationship

माँ का अनोखा रिश्ता-Mother’s Unique Relationship

फिक्र में बच्चों की कुछ इस कदर घुल जाती है मां नौजवां होते हुए भी बूढ़ी नजर आती है मां रूह के रिश्ते की गहराई तो देखिए चोट लगती है हमें और सिसकती है मां कब जरूरत मेरे बच्चों को हो मेरी इतना सोच कर सो जातीं है उसकी आंखें और जागती रहती है मां …

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मानस में बैठी माँ...

मानस में बैठी माँ…

आँखों में है उसे संजोये सारा गांव गिराव।देवलोक दिखता था जब भी छूता माँ के पांव।। बिना कहे ही मेरे मन का दर्द समझती थीअनपढ़ होकर भी कविता का अर्थ समझती थीशगुन मनाती थी पाहुन का सुन कागा के कांवफूलों की पंखुड़ी जैसे थी उसकी अद्भुत डांटशब्द-शब्द लगते थे जैसे सामवेद का पाठजानबूझकर भी हारा …

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मेरी प्यारी मेरी दुलारी नन्ही सी कली

मेरी प्यारी मेरी दुलारी नन्ही सी कली

मेरी प्यारी मेरी दुलारी नन्ही सी कलीरोज देर तक मुझे जगाती नन्ही सी कली हंसती है तो खनखन जैसी आवाजें आती हैंपढ़ती है तो ऐसा लगता मां सरस्वती आती हैंकरके शैतानी वह मुझको रोज हंसाती हैलोटपोट हो जाता जब वह कुछ बन के आती है नन्हा बैग लाद पीठ पर जाती वह स्कूलना अच्छा लगता …

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