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एक चींटी ने इंसान को IAS अधिकारी बना दिया, पढ़ें बहुत ही रोचक प्रेणनादायी कहानी

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रमेश एक पत्थर के पास बैठा हुआ बहुत ही उदास था। उसके समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। अभी तक वह 4 से ज्यादा बार फौज के लिए दौड़ चुका था और उसने कई बार दौड़ और फिजिकल पास किया किंतु मेडिकल में वह हर बार निकाल दिया जाता। इससे वह बहुत ही परेशान था उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था। क्योंकि चार प्रयास करने के बाद भी उसको सफलता नहीं मिली थी।

वह पूरी तरह से वह टूट चुका था और उसने फौज में नौकरी करने का इरादा पूरी तरह से छोड़ दिया था। लेकिन 12वीं पास होने के कारण उसके पास कुछ ज्यादा विकल्प भी नहीं थे। इसलिए वह फौज में ज्यादा इंटरेस्ट रख रहा था लेकिन असफलता उसके पीछे हाथ धो कर पड़ी हुई थी। वह हर समय यही सोचता रहता कि आखिर उसका सिलेक्शन क्यों नहीं हो पा रहा है ? चार बार उसने भरकर प्रयास किए थे किंतु उसके हाथ सिर्फ असफलता लगी थी ?

वह टूटा हुआ उस पत्थर के पास बैठा हुआ था और अपने भविष्य के बारे में सोच रहा था। अगर मेरी नौकरी नहीं लगी तो क्या होगा? क्या मैं अपने बच्चों को अच्छा भविष्य दे पाऊंगा? क्या मैं खुद को माफ कर पाऊंगा? इसी तरह उसके दिमाग में हजारों सवाल पैदा हो रहे थे। वह पूरी तरह से अंदर से टूटा हुआ था।

अचानक उसकी नजर सामने एक पत्थर पर पड़ी जिसकी ऊंचाई लगभग 3 मीटर थी। उस पत्थर को देखते ही उसको कुछ ऐसा दिखाई दिया कि उसके मन में जितने भी नकारात्मक सोचे थीं। वह धीरे-धीरे वहीं बदलने लगी। उसने सामने देखा की एक छोटी सी चींटी अपने से लगभग 10 गुना वजन लेकर उस 3 मीटर ऊंचे पत्थर पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी।

लेकिन वह ऊपर चढ़ने से कुछ ही दूर पहुंचने के बाद फिर नीचे गिर जाती। लेकिन वह हार मानने को तैयार नहीं थी। वह पुनः कोशिश करती और फिर उस भोजन के टुकड़े को लेकर उस पत्थर पर चढ़ने लगती। रमेश की नजर उसी पर गड़ी हुई थी। वह उसे देख रहा था लगभग 10 बार चींटी अपने से 10 गुना भोजन का टुकड़ा लेकर चढ़ी थी। उसने देखा 11वीं बार अचानक वह उस पत्थर के ऊपर पहुंच गई।

बस रमेश ने ठान लिया कि मैं तो इतना हट्टा कट्टा इंसान हूं। क्या मैं यह थोड़ा सा काम नहीं कर सकता हूं। उसने अपनी फिटनेस को उसी दिन से सुधारना सही कर दिया उसकी जो कमियां थी उसने उन पर पूरा काम करना शुरू कर दिया।। वह रात दिन लक्ष्य बनाकर अपने काम में ही व्यस्त रहता। सुबह हो या शाम उसका ध्यान बस अपने लक्ष्य पर ही बना रहता था। अगले साल फिर भर्ती का समय आया रमेश पूरी तरह से तैयार था। उसने भर्ती में भाग लिया और वह सिलेक्ट हो गया।

इस बार उसने मेडिकल परीक्षा को भी अच्छी तरह से पास कर लिया था। रमेश अब फौज में नौकरी कर बहुत ही खुश था। मगर यहां तक उसकी उम्मीदें अभी पूरी नहीं हुई थी। उसने चींटी से बहुत कुछ सीख लिया था नौकरी करते करते उसने बीए कर लिया और सिविल सेवा की परीक्षा करने लगा। नौकरी भी वह बहुत ही ईमानदारी से और दिल लगाकर कर रहा था। लेकिन इसके साथ जब भी उसे समय मिलता तो अपना पूरा समय पढ़ाई में लगाता था।

आखिरकार एक दिन ऐसा भी आया कि उसने सिविल सेवा की तीसरी बार में परीक्षा पास कर ली। आज रमेश इतना खुश था उसका बखान नहीं किया जा सकता। एक चींटी से उसने जो सीखा था उसकी बदौलत आज वह भी एक ऐसे पहाड़ पर चढ़ चुका था जो उसके लिए कभी कल्पना मात्र थी।


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