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एक ऐसी शेरनी जिसने 19 दिन में 5 स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम दुनिया में रोशन कर दिया
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जिनके इरादे बुलंद होते हैं उनके लिए दुनिया का कोई भी काम कठिन नहीं होता। अगर उन लोगों ने ठान लिया तो असंभव को भी संभव करके दिखा देते हैं। आज मैं एक ऐसी ही लड़की के बारे में बताने जा रहा हूं। जिसने सिर्फ 19 दिन में पांच स्वर्ण पदक जीत कर सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया में अपना नाम रोशन कर दिया।

उस लड़की का नाम हिमा दास है। हिमा दास एक धावक हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में भाग लेतीं हैं। सन 2019 हिमा दास के लिए ऐसा आया उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिख गया। 2019 में हिमा दास ने पहला गोल्ड मेडल 2 जुलाई को ‘पोज़नान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स’ मैं 200 मीटर रेस को जीतकर जीता था। इस रेस को उन्होंने 23.65 सेकंड में दौड़ कर जीता था। इसके बाद हिमा दास ने जो कल्पना नहीं की थी वह उनके साथ हो गया।

7 जुलाई 2019 को पोलैंड में ‘कुटनो एथलेटिक्स मीट’ के दौरान 200 मीटर रेस को हिमा दास ने 23.97 सेकंड में पूरा करके दूसरा गोल्ड मेडल जीत लिया। सफर अभी थमा नहीं था। 13 जुलाई 2019 को हिमा दास ने चेक रिपब्लिक में हुई ‘क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स’ में महिलाओं की 200 मीटर रेस को 23.43 सेकंड में पूरा कर तीसरे गोल्ड मेडल पर विजय प्राप्त की।

हिमा दास अभी भी रुकने वाली नहीं थी क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी पीछे मुड़कर देखना सीखा ही नहीं था। इसलिए वह लगातार आगे ही बढ़ती जा रही थी। मात्र 19 साल की हिमा दास के हौसले सातवें आसमान पर थे। उनके हौसलों को रोकना तो दूर की बात था छूना भी असंभव जैसा लग रहा था।

17 जुलाई 2019 को चेक रिपब्लिक में आयोजित ‘ताबोर एथलेटिक्स मीट’ के दौरान महिलाओं की 200 मीटर रेस को हिमा दास ने 23.25 सेकंड में दौड़ कर चौथा स्वर्ण पदक जीत लिया। अभी भी हिमा दास रुकने वाली नहीं थी। उनके अंदर जुनून सा सवार था। ऐसा लग रहा था कि आसमान उनकी मुट्ठी में है। 20 जुलाई 2019 को हिमा दास ने 40 मीटर की स्पर्धा दौड़ को 52.09 सेकंड में पूरा करके पांचवा गोल्ड मेडल जीत लिया। हिमा दास का जुलाई महीने में सिर्फ19 दिन के अंदर यह पांचवा स्वर्ण पदक था।

हिमा दास एक गरीब परिवार से हैं लेकिन उनके इरादों ने उनको आसमान पर पहुंचा दिया। हिमा का जन्म असम राज्य के नगाँव जिले के कांधूलिमारी गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम रणजीत दास तथा माता का नाम जोनाली दास है। उनके माता पिता चावल की खेती करते हैं। ये चार भाई-बहनों से छोटी हैं। हिम दास ने अपने विद्यालय के दिनों में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलकर क्रीड़ाओंं मेंं अपनी रुचि की शुरुआत की थी। वो अपना कैरियर फुटबॉल में देख रही थीं और भारत के लिए खेलने की उम्मीद कर रही थीं।

फिर जवाहर नवोदय विद्यालय के शारीरिक शिक्षक शमशुल हक की सलाह पर उन्होंने दौड़ना शुरू किया। शमशुल हक़ ने उनकी पहचान नगाँव स्पोर्ट्स एसोसिएशन के गौरी शंकर रॉय से कराई। फिर हिमा दास जिला स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित हुईं और दो स्वर्ण पदक भी जीतीं।

जिला स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान ‘स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर’ के निपोन दास की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने हिमा दास के परिवार वालों को हिमा को गुवाहाटी भेजने के लिए मनाया जो कि उनके गांव से 140 किलोमीटर दूर था। पहले मना करने के बाद हिमा दास के घर वाले मान गए।

हिमा दास आईएएफ वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियन की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। हिमा दास ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। हिमा दास अब भी अपनी तैयारियों में जुटी हैं उनका प्रमुख लक्ष्य ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक दिलाना है। आपको बता दें इतना ही नहीं हिमा दास इससे पहले भी कई स्वर्ण जीत चुकी हैं।

उषा श्री, सिकंदराबाद, तेलंगाना

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