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एक भिखारी ने बचाई थी रेप से पीड़ित लड़की की जान, 6 साल बाद ऐसे चुकाया उस लड़की ने एहसान ( A Beggar Saved the Life of A Girl Suffering From Rape, 6 Years After the Girl Gaid the Favor )

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रघुराज वर्मा उत्तर प्रदेश के शहर मुरादाबाद का रहने वाला था। उसके परिवार में किसी प्रकार की कमी नहीं थी। एक हंसता खेलता परिवार था। लेकिन एक घटना ने रघुराज वर्मा के परिवार को पूरी तरह से हिला कर रख दिया था। हुआ यह था कि सन 2014 में कुछ दबंग लोगों ने रघुराज वर्मा के परिवार के सभी सदस्य माता-पिता सहित को मौत के घाट उतार दिया और घर को पूरी तरह से लूट लिया था। रघुराज वर्मा उस दिन घर पर नहीं था। इसलिए वह बच गया लेकिन बचने के बावजूद भी उसकी हालत मरने वालों से भी बदतर थी।

वह एक साल तक कोर्ट कचहरी के चक्कर काटता रहा लेकिन उसे किसी तरह का इंसाफ नहीं मिला। उसके पास जो भी पूंजी थी। उसने अपने परिवार को इंसाफ दिलाने में खर्च कर दी। मगर उसको इंसाफ नहीं मिला। रघुराज वर्मा पढ़ा लिखा था। उसने नौकरी के लिए भी हाथ पैर मारे लेकिन कहीं से उसको कोई सहारा नहीं मिला। इतना ही नहीं मजदूरी के लिए भी लोगों ने उसको काम नहीं दिया। हारकर उसने भीख मांगना शुरू कर दिया। उसकी उम्र उस समय सिर्फ 25 वर्ष की थी। वह रोड पर सुबह पहुंच जाता लोगों की गालियां सुनता था। इसके एवज में उसे भीख में कुछ पैसे मिल जाते थे। जिससे उसका जीवन चल रहा था। रघुराज वर्मा का घर शहर से 5 किलोमीटर की दूरी पर था। वह सुबह शहर के लिए निकल जाता और रात में घर वापस लौटता था। धीरे-धीरे रघुराज वर्मा रघु हो गया था क्योंकि उसकी पहचान अब एक भिखारी के रूप में हो रही थी।

एक दिन रघु शहर से अपने गांव आ रहा था। उस दिन उसे भीख में काफी अच्छे रुपए मिल गए थे। इसलिए वह काफी खुश था। वह मन ही मन में गुनगुनाता हुआ अपने गांव जा रहा था। शहर से लगभग दो से ढाई किलोमीटर दूर जब वह पहुंचा तो उसे पास ही किसी के हल्के से रोने की आवाज सुनाई दी। हालांकि आवाज साफ नहीं आ रही थी। रघु ने इधर-उधर देखा मगर उसे कोई दिखाई नहीं दिया। वह फिर आगे बढ़ने ही वाला था कि एक बार वही आवाज फिर उसे सुनाई दी। रघु उसी आवाज की तरफ गया। सड़क से लगभग 100 मीटर की दूरी पर जब रघु पहुंचा तो उसने कुछ ऐसा देखा की उसकी घिग्घी बंध गई। वह चीखने के बाद भी नहीं चीख पा रहा था।

रघु ने दृश्य ही ऐसा देखा था। लगभग एक 18 साल की लड़की उस झाड़ियों जैसी जगह में बंधी पड़ी थी। उसका शरीर खून से लथपथ था। बदन पर एक भी वस्त्र नहीं था। उसमें बहुत कम जान बची हुई थी। रघु भी यह नहीं समझ पा रहा था कि क्या किया जाए। उसने काफी दिमाग लगाया लेकिन वह सोच नहीं पा रहा था। रात का 10 बज गया था। रास्ता भी पूरी तरह से सन्नाटे में बदल चुका था। इसके बाद उसने जब उस लड़की की हालत देखी तो उससे रहा नहीं गया। वह लड़की बार-बार होश में आती और बेहोश हो जाती थी। जब उसे होश आता तब वह हल्की सी आवाज में बचाओ बचाओ कर के चीखती थी।

रघु ने अपने मन में सोचा कि यह अब ज्यादा सोचने का समय नहीं है। इसलिए रघु ने उस लड़की को पहले तो अपनी फटी और गंदी चादर पूरी तरह से ढका और इसके बाद उसने पूरी ताकत से उस लड़की को उठाकर अपने कंधों पर डाल लिया। रघु लंबे-लंबे कदम भरते हुए फिर शहर की तरफ भागा। लड़की अब पूरी तरफ से बेहोश हो गई थी। रघु के अंदर किसी तरह का डर नहीं था। वह भागता हुआ अस्पताल जा पहुंचा।

अस्पताल में डॉक्टरों ने जब उससे पूछताछ की तो उसने सारा सच बता दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने उस लड़की को भर्ती किया। पुलिस को सूचना दी गई और इलाज शुरू किया गया। रघु को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। उस पर उल्टे आरोप भी लगाया जा रहा था। इतना ही नहीं पुलिस वालों द्वारा उसकी पिटाई भी की गई। लेकिन रघु जो सच था वही बोलता रहा। अप सबको उम्मीद थी कि जब लड़की को होश आयेगा तभी पूरा सच सामने आएगा। 3 दिनों तक वह लड़की अस्पताल में भर्ती रही। पुलिस उसके माता-पिता की खोज करती रही लेकिन पुलिस उसके माता-पिता को नहीं खोज पाई। तीसरे दिन उस लड़की को होश आया और उसने पुलिस वालों को जो बताया वह काफी होश उड़ा देने वाला था।

उस लड़के ने अपना नाम अंकिता दीक्षित बताया। उसने कहा उस दिन मैं अपनी कोचिंग क्लास से अपने घर जा रही थी। अचानक रास्ते में कुछ लोगों ने मुझे जबरदस्ती एक गाड़ी में खींच लिया। गाड़ी में बिठाते उन लोगों ने मेरे मुंह पर पट्टी बांध दी। ताकि मैं शोर न मचा सकूं। लगभग 30 मिनट तक गाड़ी चलती रही। इसके बाद उन लोगों ने एक सुनसान जगह पर गाड़ी को रोका और बारी बारी से मेरे साथ रेप किया। मैं लाख कोशिश करने के बाद भी चिल्ला नहीं सकती थी। इसके बाद उन लोगों ने मुझे फिर गाड़ी में डाला और एक सुनसान जगह पर फेक दिया। मुझे पता नहीं मैं कितनी देर तक वहां पड़ी रही लेकिन जब मुझे होश आया तब मैं चिल्लाई। उसके बाद उस देवता जैसे इंसान में मुझे यहां तक पहुंचा।

जब वो मुझे यहां आ रहा था उस समय मैं होश में आते थीं और फिर बेहोश हो जाती थी लेकिन उस आदमी को मैं कभी नहीं भूल सकती। जिसने मेरी जान बचाई। पुलिस ने जब उन लोगों के बारे में पूछा, जिन लोगों ने उसके साथ रेप किया था तो अंकिता ने बताया कि उन लोगों ने अपने मुंह को ढक रखा था। इसलिए मैं किसी को पहचान नहीं सकी। इसके बाद पुलिस ने अंकिता के घर बालों को बुलाया अंकिता अपने मम्मी पापा से मिलकर खूब रोई लेकिन वह उस इंसान से मिलना चाहती थी जिसने उसकी जान बचाई थी। पुलिस वालों ने रघु को लाकर जब अंकिता के सामने खड़ा किया तो उसके होश उड़ गए। वह तो एक भिखारी था। उसके कपड़े फटे हुए थे। बदन भी मैला कुचैला था। एक बार तो अंकिता ने मन ही मन में उससे नफरत की लेकिन जब उसके सामने वह दृश्य आए तो वह चीख कर रघु से लिपट गई। 2 दिन के बाद अंकिता को अस्पताल से छुट्टी मिल गई और रघु भी अपने काम में लग गया।

मार्च 2020 में रघु चौराहे पर खड़ा भीख मांग रहा था। उसकी हालत अब और भी खराब हो गई थी। शक्ल से देखने पर उसे पहचानना बहुत मुश्किल था। उसकी किस्मत में शायद यही लिखा था यही आप सोचेंगे। इंसान यही भूल जाता है कि उसकी किस्मत सिर्फ उसके कर्मों से लिखी जाती है और यही हाल रघु के साथ होने जा रहा था। जो इंसान बुरे कर्म करता है उसके साथ बुरा होता है और जो इंसान अच्छे कर्म करता है उसके साथ सदैव अच्छा होता है। यह प्रकृति का नियम है। किस्मत इंसान के कर्म से बदलती है और जो इंसान अपने कर्म के भरोसे बैठा रहता है उसे वही मिलता है जो उसकी किस्मत में होता है अर्थात गरीबी और जो कुछ आगे बढ़कर करता है उसे वह मिलता है जिसकी वह चाहत रखता है।

रघु लगभग 31 साल का हो चुका था लेकिन उसकी उम्र देखने में 50 साल के व्यक्ति जैसी लगती थी। उस दिन रघु जब चौराहे पर भीख मांग रहा था तभी एक कार आई और उसके पास आकर रुक गई। उसमें दो आदमी बैठे हुए थे। उन लोगों ने रघु को कार में बिठाया और कार रोड पर दौड़ने लगी। लगभग आधा घंटा के बाद का एक बहुत बड़े से मकान में जाकर रुकी। उन लोगों ने रघु से अंदर चलने के लिए कहा है। लेकिन वहां की साफ सफाई और उस हवेली जैसे मकान को देखकर रघु की अंदर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। उन दो लोगों ने उसको अंदर चलने के लिए कहा तो वह डर-डर कर अंदर चला गया।

अंदर जाकर उसने देखा कि एक खूबसूरत महिला बैठी है। उस महिला ने रघु को देखते ही अपने गले से लगा लिया। रघु कुछ समझ नहीं पा रहा था। उसके साथ यह सब क्या हो रहा है ? उस महिला ने कहा रघु क्या तुम मुझे नहीं पहचानते ? रघु ने ना मैं अपनी गर्दन हिला दी। तब उस महिला ने रघु को बताया मैं वही लड़की हूं जिसकी तुमने 6 साल पहले जान बचाई थी। अब रघु को सब कुछ याद आ चुका था। सामने खड़ी महिला रो रही थी। उसकी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। उसको भावुक देखकर रघु भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पाया।

वह महिला कोई और नहीं अंकिता थी। जिसका सन 2014 में रेप हुआ था और उसे झाड़ियों में फेंक दिया गया था। जिसे रघु ने बचाया था। अंकिता ने रघु को नहलवाया और सुंदर कपड़े दिए। अंकिता ने कहा रघु भैया आज के बाद तुम यही रहोगे। अब तुम्हें भीख मांगने की जरूरत नहीं है। तुम्हारी बहन तुम्हारी देखभाल करेंगी। रघु सिसक सिसक कर रो पड़ा। वह कभी खुद को देखता और कभी उस हवेली को देखता। उसे अब भी पूरी तरह से विश्वास नहीं हो पा रहा था।

अंकिता के माता पिता काफी पुराने ख्यालात के थे। उनका कहना था कि उस भिखारी को एहसान के रूप में कुछ रुपए दे दो। लेकिन अंकिता ऐसे इंसान को अपने सीने से लगा कर रखना चाहती थी। जिसने उसे नई जिंदगी दी थी। अंकिता एक बहुत बड़े बिजनेसमैन की पत्नी बन चुकी थी।

अंकिता और रघु घर में रहने लगे। रघु भी अंकिता के पति का बिजनेस में हाथ बंटाने लगा। अंकिता ने रघु की शादी करा दी। अब रघु अपनी पत्नी के साथ अंकिता के साथ रहता है और अंकिता के पति के बिजनेस में हाथ बंटाता है। अब रघु को वह सारी खुशियां मिल चुकी थी। जिन्हें कभी उससे छीन लिया गया था। रघु और अंकिता अब साथ-साथ रहते हैं और सभी मिलकर साथ साथ ही खाना खाते हैं।

रघु अंकिता के परिवार का हिस्सा बन चुका है। हालाकी अंकिता के मां-बाप आज भी रघु को पसंद नहीं करते हैं लेकिन अंकिता रघु को अपना भाई मानती है। अंकिता ने सारी उम्र अपने साथ उसे रखने का वादा किया है। अंकिता ने उसे सारी खुशियां देने का वचन निभाया है। आज रघु बहुत खुश है। अंकिता इसलिए खुश है क्यों वह ऐसे भाई के साथ रहती है जो उसके लिए भगवान जैसा है। अंकिता का पति भी रघु को बहुत पसंद करता है। इसलिए अब रघु की जिंदगी में किसी चीज की कमी नहीं है। अब रघु पुनः रघु से रघुराज वर्मा बन गया है।

Dinesh Kashyap

236/C Ramesh Nagar, New Delhi

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