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वीरांगना : आज के युग की ऐसी 1 लड़की जिसने दरिंदों को मुंह तोड़ जवाब दिया

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वीरांगना पुराने समय में ही नहीं आज के समय में भी आपको देखने को मिल जाएंगी। आज मैं आपको एक ऐसे ही वीरांगना के बारे में बताने जा रहा हूं जिसके बारे में जानते ही आप पूरी तरह से उस दुनिया को नफरत करने लगेंगे जहां पर पाप का सैलाब आता है। आज मैं उस वीरांगना की कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसने ऐसा युद्ध लड़ा जिसके लिए शायद किसी तलवार की जरूरत नहीं पड़ी और एक ऐसे भवर में उलझी जिस से निकलना उसके लिए मुश्किल हो गया।

यह सिर्फ एक वीरांगना की कहानी नहीं है यह कहानी है आज के उसूलों की, आज की मर्यादाओं की, आज के समय के विचारों की आज के समय हो रहे अत्याचारों की, आज के समय जो गलत काम हो रहे उनके प्रति आवाज उठाने वालों की, ऐसी ही एक कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूं। जिस ने आवाज उठाई तो उसको इतना बड़ा हर्जाना भरना पड़ा जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।

वीरांगना एक ऐसा नाम है जिसमें लड़कर शहीद होना माना जाता है लेकिन आज के समय लड़ने वाले कम है और धोखे से नोचने और खाने वाले ज्यादा हो चुके हैं। मैं खासकर इसी मुद्दे पर आज बात करूंगा और उस वीरांगना के बारे में बताऊंगा जिसने ऐसे लोगों से टक्कर ली जिनसे अच्छे-अच्छे लोगों को पसीने आते थे।

वीरांगना की कहानी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर की यह घटना आपको काफी परेशान कर सकती है। उस लड़की का नाम आरती था। बचपन में पढ़ने के लिए उसके पास किताबें नहीं थी लेकिन इसके बावजूद भी उसने एलएलबी तक पढ़ाई की एलएलबी पूरी होने के बाद उसने पैसा बटोरने के बारे में नहीं सोचा बल्कि उन लोगों की मदद करने के बारे में सोचा जिनका अक्सर दुनिया में कोई सहारा नहीं बनता। ऐसे लोगों के प्रति आरती अपने जी जान लगा देती थी।

आरती मजलूम गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करती थी लेकिन उसकी किस्मत में एक ऐसा मोड़ भी आया जिसने उसकी जिंदगी को तबाह कर के रख दिया। ऐसा क्या हुआ था आरती के साथ। आइए विस्तार से जानते हैं।

उस समय आरती रिया नाम की एक लड़की की मदद कर रही थी जिसके साथ सामूहिक रूप से कुछ दबंगों ने रेप किया था। इससे जौनपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में भूचाल आ गया था और रेप करने वाले दरिंदे इतने ताकतवर थे कि उनके खिलाफ हजारों वकीलों की फौज भी नतमस्तक हो चुकी थी जो भी रिया का केस लेने की कोशिश करता उसके या तो हाथ पैर तुड़वा दिए जाते हैं या फिर उसे जिंदा ही जमीन में दफना दिया जाता।

ऐसे में गवाह नहीं मिलते क्योंकि गवाही देना मौत के मुंह में जाने के बराबर था। रिया दरबदर भटकती रही लेकिन उसका कोई सहारा नहीं बना। उसके माता-पिता गरीब किसान थे। रिया एक खूबसूरत लड़की थी जो इंटर में पढ़ती थी। देखने में वह बहुत ही खूबसूरत थी। इसी का उन दरिंदों ने फायदा उठाया और उसके साथ रेप किया।

रिया गरीब जरूर थी लेकिन उसके इरादे बहुत ही मजबूत थे। उसे दर दर पर ठोकरें खाने को मिल रही थी लेकिन वह पीछे हटने का नाम नहीं ले रही थी। काफी लोगों ने पुलिस द्वारा भी उससे कहलवाया कि वह चुप बैठ जाए लेकिन रिया चुप बैठने वाली लड़कियों में नहीं थी।

वीरांगना

उसके माता-पिता ने भी उस को काफी समझाया की बेटी भूल जा उन सब बातों को जो तेरे साथ हुआ है लेकिन रिया ने कहा कि मैं ऐसी कल्पना भी नहीं कर सकतीं। आज मेरे साथ ऐसा हुआ है कल यह भेड़िए किसी दूसरी लड़की को अपना शिकार बनाएंगे। इसलिए जब तक मेरे शरीर में जान रहेगी इन दरिंदों को सजा दिलाकर रहूंगी। इतनी ताकतवर और इरादों की मजबूत होने के बाद भी रिया का साथ देने के लिए कोई भी सामने नहीं आया। रिया एक ऐसी जात से आती थी जिसे अछूत माना जाता है।

एक दिन रिया को आरती के बारे में पता चला तो वह आरती के घर चली गई। आरती ने जब रिया की पूरी कहानी सुनी तो वह रो पड़ी। उसने कहा अब तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है। तुम्हारे केस को मैं लडूंगी।

इसके बाद वीरांगना की तरह आरती ने रिया के केस को अपने हाथ में ले लिया। काफी दबंगों ने आरती को परेशान करने की कोशिश भी की लेकिन आरती भी उन लड़कियों में नहीं थी जो मामूली गुंडों से डर जाती। आरती ने वीरांगना की तरह जमकर रिया का केस लड़ा और उन गुंडों को अदालत के सामने नंगा करके रख दिया। जितने भी सबूत थे आरती ने इकट्ठे किए और अदालत के सामने रखें।

आखिरकार उन दबंगों को सजा होने वाली थी। आरती भी वीरांगना की तरह लगातार सबूत जुटा रही थी। वह चाहती थी रिया को इंसाफ मिले। इसीलिए दिन रात रिया के केस को ही अध्ययन करती रहती थी। वह आखिरी दिन भी आ गया जब उन दरिंदों को सजा बोली जाने वाली थी।

जज साहब ने आरती की बात सुनी और इसके बाद उन दरिंदों के वकील की भी बात सुनी। इसके उपरांत केस रिजर्व कर दिया और कहां फैसला 3 दिन बाद सुनाया जाएगा। रिया का पूरा काम हो चुका था। आरती भी बहुत खुश थी लेकिन अगली रात ही आरती को किसी ने मार दिया।

आरती इस दुनिया में नहीं थी वह एक वीरांगना की तरह लड़ी थी, जब जज साहब ने फैसला सुनाया तो उन सभी दरिंदों को फांसी की सजा सुनाई गई। रिया बहुत दुखी थी लेकिन उसके अंदर अब और भी ताकत आ गई थी क्योंकि वह आरती जैसी लड़की के साथ रह चुकी थी। उसे इंसाफ मिला और दरिंदों को फांसी पर टांग दिया गया।

इसके बाद रिया ने भी ठान लिया कि वह भी आरती की तरह निडर बनेगी और उन लोगो की मदद करेगी जिनकी डर के कारण लोग मदद नहीं करते। एक वीरांगना के मरने के बाद दूसरी वीरांगना तैयार हो चुकी थी.

लेखक 

आर के गौतम 

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